Oct 26 2021 / 11:23 AM

नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें पूजा विधि

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आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में नवरात्रि की शुरुआती हो गई है और आज यानि 9 अक्टूबर को तीसरा नवरात्रि है। इस दिन माता दुर्गा के चंद्रघंटा और कूष्मांडा दोनों ही स्वरूपों की पूजा की जाएगी। आज ही के दिन तीसरा और चौथा नवरात्र मनाया जा रहा है। दरअसल, अश्विनी शुक्ल पक्ष की उदया तिथि तृतीया तिथि सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उसके बाद चतुर्थी तिथि भोर 4 बजकर 55 मिनट तक ही रहेगी। इसलिए एक ही दिन 2 नवरात्र मनाए जाएंगे।

मां चंद्रघंटा को राक्षसों का वध करने वाली देवी कहा जाता है। मान्यता है कि मां दुर्गा के चौथे रूप मां चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार की अर्धचंद्र सुशोभित है और इसलिए इन्हें मां चंद्रघंटा के नाम से पूजा जाता है। मां चंद्रघंटा सिंह पर विराजमान हैं और इनके दस हाथ हैं। कहा जाता है कि मां चंद्रघंटा की भक्तिभाव से पूजा करने से मां खुश होकर अपनी कृपा बरसाती हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि-
-माता चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए उनकी सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए।
-माता की चौकी मां चंद्रघंटा की प्रतिमा स्थापित करें।
-इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें।
-माता की चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें।
-फिर पूजा का संकल्प लें और चंद्रघंटा मां की पूजा करें।
-चंद्रघंटा मां की पूजा और आरती करें।
-इसके बाद प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व-
हिंदू शास्त्रों के अनुसार मां चंद्रघंटा के दस हाथ हैं। इनके चार हाथों में कमल का फूल, धनुष, माला और तीर हैं। पांचवें हाथ में अभय मुद्रा है। जबकि अन्य चार हाथों में त्रिशूल, गदा, कमंडल और तलवार है। दसवां हाथ वरद मुद्रा में रहता है। मां चंद्राघंटा भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

मां चंद्रघंटा के मंत्र-
मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय कुछ भक्तों को दो मंत्रों का जाप कम से कम 11 बार करना चाहिए।

पहला मंत्र: पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
दूसरा मंत्र: या देवी सर्वभू‍तेषु मां चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां चंद्रघंटा का विशेष भोग-
मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा में विशेष प्रकार का भोगा चढ़ाया जाता है। मां को मीठी खीर बेहद प्रिय है और इस दिन पूजा में गाय के दूध से बनी खीर का भोग लगाएं। इससे मां प्रसन्न होंगी और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाएंगी। यह भी कहा जाता है​ कि यदि इस दिन कन्याओं को खीर, हलवा या मिठाई ​खिलाई जाए तो मां प्रसन्न होती हैं।

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