Oct 26 2021 / 10:29 AM

नवरात्रि के सातवें दिन इस तरह करें मां कालरात्रि की पूजा, जानिए पूजा विधि

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नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। आज 12 अक्टूबर को मां दुर्गा के सांतवें स्वरूप देवी कालरात्रि की पूजा हो रही है। नवरात्रि में सप्तमी का विशेष महत्व है। सप्तमी की रात को माता दुर्गा की आस्था और विश्वास के साथ भक्त जागरण करते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता दुर्गा ने कालरात्रि का रूप असुरों के राजा रक्त बीज नाम के दो शक्तिशाली असुरों का वध करने के लिए धारण किया था।

ऐसा माना जाता है कि सप्तमी को माता कालरात्रि की पूरी विधि-विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। देखने से माता कालरात्रि का स्वरूप भयावह प्रतीत होता है लेकिन माना जाता है कि अपने भक्तों के लिए मां इस रूप में भी कोमल और दयामयी होती हैं। माता कालरात्रि इस रूप में गधे की सवारी करती हैं।

कहा जाता है कि माता इस रूप में सभी दुष्ट दानवों का सर्वनाश करने के लिए काल बनकर आती हैं। मां के इस रूप के पीछे की मान्यता यह भी है कि माता अपने भक्तों को सभी काल और संकट से बचाती हैं। माता का रंग कृष्ण वर्ण है इस कारण से माता को कालरात्रि कहा जाता है।

ऐसे करें मां कालरात्रि की पूजा-

माता कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के अन्य दिनों की तरह ही की जाती है। स्नान करके पूजास्थल को गंगाजल से पवित्र कर माता को फूल, अक्षत, लाल पुष्प, कुमकुम के साथ पूजा करें। फिर मां को उनके पसंद का भोग लगाएं। मां की प्रतिमा के सामने दीपक और धूप जलाएं। भोग लगाने के बाद माता की स्तुति करें। माता की आरती गाकर पूजा की समाप्ति करें।

इन मंत्रों का शुद्ध उच्चारण के साथ करें जाप-

या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां कालरात्रि का प्रिय भोग-

माता कालरात्रि को गुड़ या उससे बनी चीजें अति प्रिय होती है। इसलिए आप सादा गुड़ या फिर गुड़ से बना हलवा भी मां को भोग लगा सकते हैं। मां को गुड़ से बनी मिठाई का भी भोग चढ़ाया जा सकता है।

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