Oct 26 2021 / 10:06 AM

ये लोग महात्मा गांधी को हटाकर सावरकर को देश का राष्ट्रपिता बना देंगे: ओवैसी

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नई दिल्ली। वीडी सावरकर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तंज किया है। ओवैसी ने राजनाथ सिंह के बयान पर तंज करते हुए कहा कि अगर यह सब ही चलता रहा तो वे एक दिन महात्मा गांधी को हटा कर सावरकर को देश का राष्ट्रपिता बना देंगे।

1910 के दशक में अंडमान में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सावरकर की दया याचिकाओं के बारे में विवाद का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह एक कैदी का अधिकार था और उन्होंने महात्मा गांधी के कहने पर ऐसा किया। उन्होंने सावरकर की तुलना शेर से करते हुए कहा था कि उनके बारे में गलत बातें दुष्प्रचारित की जाती रहीं हैं।

इसी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, वे विकृत इतिहास पेश कर रहे हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो वे महात्मा गांधी को हटा देंगे और सावरकर को राष्ट्रपिता बना देंगे, जिन पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप था और जिन्हें जस्टिस जीवन लाल कपूर की जांच में ‘हत्या में शामिल’ करार दिया गया था।

बता दें कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने सावरकर पर आधरित एक पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान राजनाथ सिंह ने सावरकर को पहला रक्षा विशेषज्ञ और शेर करार दिया।

उन्होंने सावरकर द्वारा किए कामों की खूब सराहना की। वहीं, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि लोगों के अंदर अभी भी उनके बारे में जानकारी अभाव है। बता दें कि सावरकर पर आधारित इस पुस्तक को उदय माहूकर ने लिखा है। उद्य माहूरखर मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार, 12 अक्टूबर को कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक वीडी सावरकर ने भारत को मजबूत रक्षा और राजनयिक सिद्धांत के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने सावरकर को 20वीं शताब्दी में भारत के सबसे बड़े और पहले रक्षा और रणनीतिक मामलों का विशेषज्ञ बताया।

दिल्ली में सावरकर पर एक किताब के विमोचन के मौके पर रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मार्क्सवादी और लेनिनवादी विचारधाराओं का पालन करने वाले लोगों ने सावरकर पर फासीवादी और हिंदुत्व के समर्थक होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, अन्य देशों के साथ भारत के संबंध इस बात पर निर्भर होने चाहिए कि वे हमारी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए कितने अनुकूल हैं। वह स्पष्ट थे कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे देश में किस तरह की सरकार थी। कोई भी देश तब तक दोस्त रहेगा जब तक यह हमारे हितों के अनुकूल रहेगा।

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