Sep 17 2021 / 6:22 AM

‘हम पृथ्वी को बचा सकते हैं और हमें यही करना चाहिए!’

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एक्टर और क्लाइमेट एडवोकेट भूमि पेडणेकर ने खतरे की घंटी बजाते हुए इच्छा जाहिर की है कि अपने प्लैनेट को बचाने और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करने में सभी लोग अपना योगदान दें

युवा बॉलीवुड स्टार और क्लाइमेट एडवोकेट भूमि पेडणेकर क्लाइमेट चेंज को लेकर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता पैदा करने के लिए एक भी दिन चैन से नहीं बैठतीं। देश भर के क्लाइमेट कार्यकर्ताओं के साथ सहभागिता करने से लेकर इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए अपने सोशल मीडिया का उपयोग करने तथा क्लाइमेट चेंज को लेकर उठाए जा रहे कदमों के बारे में भविष्य के रोडमैप पर चर्चा करने के लिए आयोजित सम्मेलनों में भाग लेने तक भूमि ने इस प्लैनेट की रक्षा के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं! उनका मानना है कि पृथ्वी की रक्षा करने के लिए अभी भी समय शेष है, लेकिन इसके लिए हम सभी को एकजुट होना पड़ेगा और अपने दैनिक जीवन में बदलाव लाने होंगे।

भूमि कहती हैं, “मैं मानती हूं कि जलवायु संकट में घिर जाने को लेकर हमारे बीच जागरूकता अवश्य बढ़ रही है, लेकिन पर्यावरण बचाने की दिशा में हम सबको जो कदम उठाने चाहिए, हम उसके करीब भी नहीं पहुंच पाए हैं। आने वाले भविष्य की रक्षा के लिए अपने दैनिक जीवन के कार्यकलापों के बारे में हम सभी को अत्यधिक सजग व सचेत रहने की जरूरत है। मैं देख सकती हूं कि लोग अपने प्लैनेट की परवाह करने और एक गहरे जुड़ाव के साथ खुद में बदलाव लाकर बेहतर बनने के बारे में चर्चा करने लगे हैं। जी हां, यह एक शुरुआत भर है, इस दिशा में अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना बाकी है।”

भूमि एक बेहद सराहनीय सोशल मीडिया पहल क्लाइमेट वारियर की अगुवाई कर रही हैं, जिसका उद्देश्य प्रकृति की रक्षा करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। वह बताती हैं, ”क्लाइमेट वारियर ज्यादा से ज्यादा जागरूकता फैलाने की भरपूर कोशिश कर रहा है। मैंने बदलाव लाने और क्लाइमेट जस्टिस की जरूरत के बारे में पूरा दम लगाकर सक्रिय और मुखर होने का प्रयास किया है। हमें अपने दैनिक जीवन में इसका समाधान खोजने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। छोटे से छोटा योगदान भी मायने रखता है और छोटी से छोटी कोशिश का भी नतीजा निकलता है।”

हाल ही में हमारे प्लैनेट पर कहर बरपा चुके मौसम के गंभीर हालात को लेकर भूमि बड़ी चिंतित हैं। उनका मानना है, “आप देख सकते हैं कि हम मौसम के भयंकर प्रकोप झेलते चले आ रहे हैं। आने वाले वर्षों में हालात और खराब ही होंगे। शोधकर्ताओं और सामने आए डेटा ने इसे साबित कर दिया है, इसलिए अब इस खतरे को हवाहवाई नहीं समझना चाहिए। हमें संकट की गंभीरता के प्रति सचेत रहना होगा और सजगता के साथ सोचना पड़ेगा कि आने वाले दशकों में यह संकट कितनी भयानक शक्ल अख्तियार करने जा रहा है।”

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