Sep 20 2021 / 11:40 PM

हम अफगानिस्तान की स्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली। दिल्ली में स्वर्गीय बलरामजी दास टंडन व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर में बचा हुआ आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा। यह विश्वास इसलिए है, क्योंकि धारा 370, 35A के चलते अलगाववादी ताकतों को जो ताकत मिलती थी, वह खत्म हो गई है।

रक्षा मंत्री ने कहा, पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मॉडल भारत में ध्वस्त हो रहा है। हाल के कुछ वर्षों में उन्होंने सीमा पर सीज़फायर उल्लंघन बढ़ा दिए थे। सुरक्षाबलों से उन्हें हमेशा मुंहतोड़ जवाब मिला। पाकिस्तान को समझ आने लगा है कि सीज़फायर उल्लंघन से भी उनको कोई खास लाभ नहीं मिलने वाला है। भारतीयों की सुरक्षा के साथ-साथ हमारी सरकार यह भी चाहती है कि वहां बन रही परिस्थितियों का फायदा उठाकर देश-विरोधी शक्तियां, सीमापार से आतंकवाद को बढ़ावा न दे सकें।

अफगानिस्तान पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि पड़ोस के अफगानिस्तान में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह सुरक्षा की दृष्टि से नये सवाल खड़े कर रहा है। वहां के हालात पर हमारी सरकार लगातार नजर बनाये हुए है।

गलवान में चीन के साथ हुई झड़प पर बोलते हुए उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सेनाओं को यह स्पष्ट बता रखा है कि एलएसी पर किसी भी एकतरफा कार्रवाई को नजरअंदाज नही किया जाना चाहिए। गलवान में उस दिन भारतीय सेना ने यही किया और पूरी बहादुरी से पीएलए के सैनिकों का मुकाबला करते हुए उन्हें पीछे जाने पर मजबूर किया।

उन्होंने कहा, गलवान की घटना को एक वर्ष बीत चुका है मगर जिस शौर्य, पराक्रम और साथ में संयम का परिचय भारतीय सेना ने दिया है, वह अतुलनीय है और आने वाली पीढ़ियां भी उन जांबाज सैनिकों पर गर्व करेंगी।

रक्षा मंत्री ने कहा, मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हम भारत की सीमा, उसके सम्मान और स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे। सीमाओं की पवित्रता को हम कतई भंग नही होने देंगे। लद्दाख के साथ-साथ उत्तर पूर्व में भी काफी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यह सब देश में सिर्फ एक इ्न्फ्रा प्रोजेक्ट भर नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा ग्रिड का अहम हिस्सा है।

उन्होंने कहा, साल 2014 में जब हमारी सरकार बनी थी तो देश के करीब 160 जिले नक्सलवाद की समस्या से जूझ भी रहे थे। जबकि साल 2019 में ऐसे नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या घटकर लगभग 50 के आसपास ही रह गई थी। सही मायनों में उनमें से भी अस्सी फीसदी घटनाएं केवल 8-10 जिलों में ही हो रही थी। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कुछ नए खतरे भी सामने आए है, जो आधुनिक तकनीक के विकास के कारण देखने को मिले है। जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन की घटना ने इस तरफ हम सबका ध्यान आकर्षित किया है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को नई चुनौतियों के लिए लगातार अपडेट और अपग्रेड करते रहना है।

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