Dec 02 2021 / 12:15 AM

तुलसी विवाह 2021: जाने शुभ मुहूर्त, महत्व, व पूजा विधि

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कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कार्तिक स्नान कर भगवान विष्णु के साथ तुलसी का विवाह करवाया जाता है। तुलसी तथा शालिग्राम का विवाह हिंदू शास्त्रों में बड़ा महत्व होता है। कार्तिक माह की देवोत्थान एकादशी के दिन मनाया जाने वाला विशुद्ध मांगलिक और आध्यात्मिक प्रसंग है। इसे देवउठनी एकादशी के रुप में भी जाना जाता है। इस साल ये पर्व 15 नवंबर को पड़ रही है।

तुसली विवाह शुभ मुहुर्त –

तुलसी विवाह सोमवार, नवम्बर 15, 2021 को
द्वादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 15, 2021 को 06:39 ए एम बजे
द्वादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 16, 2021 को 08:01 ए एम बजे

तुसली विवाह पूजन विधि –

इस खास तौर पर तुसली के पौधे की पूजा की जाती है और माता तुसली का विवाह भगवान शालिग्राम से कराया जाता है। जिसके लिए सबसे पहले तुलसी के पौधे के चारों तरफ मंडप बनाएं। फिर तुलसी के पौधे पर लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं। फिर श्रृंगार की चीजें भी चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शालिग्राम की पूजा करें। फिर भगवान शालिग्राम की मूर्ति को उठाए और तुलसी जी के साथ सात परिक्रमा कराएं। इसके बाद अंत में आरती करें और विवाह पूर्ण करें।

तुलसी विवाह का महत्व –

हिन्दू शास्त्रों में तुलसी का विवाह करना बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी विवाह से घर-परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और तुलसी विवाह से सबसे बड़े दान यानी कन्यादान का सुख प्राप्त होता है। जिस घर में बेटी ना हो उस घर में तुलसी विवाह आवश्यक रूप से करवानी चाहिए। कई जगहों पर तुलसी विवाह छोटी दिवाली के रूप में मनाते है।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवों को उठाकर शुभ कामों की शुरुआत की जाती है जैसे रुकी हुई पूजा, शादी, मुंडन और हवन इत्यादि की शुरुआत की जाती है। जिस प्रकार तुलसी विवाह से हमारे पापो का विनाश होता है सुख-समद्धि मिलती है ठीक उसी प्रकार तुलसी का पौधा हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। इसलिए आज ही हम अपने घर-बगीचे में तुलसी का पौधा लगाए और पूरी श्रद्धा से पूजा-पथ करे।

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