Sep 22 2021 / 1:14 PM

‘उम्मीद है कि क्लाइमेट चेंज का ज्वलंत मुद्दा सरकारों ने भुलाया नहीं होगा!’: वर्ल्ड नेचर कंजर्वेशन डे पर कहना है भूमि पेडणेकर का

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युवा बॉलीवुड स्टार भूमि पेडणेकर क्लाइमेट चेंज की पैरोकार हैं, जो एक काबिले तारीफ सोशल मीडिया इनिशिएटिव ‘क्लाइमेट वारियर’ चलाती हैं। प्रकृति की रक्षा करने के बारे में जागरूकता बढ़ाना उनके इस इनिशिएटिव का मुख्य उद्देश्य है। आज वर्ल्ड नेचर कंजर्वेशन डे पर भूमि ने उम्मीद जाहिर की है कि महामारी के चलते दुनिया भर की सरकारों का ध्यान क्लाइमेट चेंज से हटा नहीं होगा।

भूमि कहती हैं, “कोविड-19 पर पूरा ध्यान देने और दुनिया का कारोबार फिर से शुरू करने के साथ-साथ हमें यह अहसास होना चाहिए कि हमारे बात करते वक्त भी क्लाइमेट चेंज जारी है। यकीनन हमारा पूरा ध्यान कोरोना वायरस महामारी पर केंद्रित होना ही चाहिए था, लेकिन मैं उम्मीद कर रही हूं कि क्लाइमेट चेंज का ज्वलंत मुद्दा सरकारों ने भुलाया नहीं होगा।”

दुनिया भर के लोगों को प्रभावित करने वाले भयंकर मौसम को लेकर भूमि बड़ी चिंतित हैं। वह बताती हैं, “महामारी ने हमें चीजों को जांच कर ठीक करने, खुद को तथा पर्यावरण के प्रति अपने रवैये को रीसेट करने का समय दिया है। हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हमारे आसपास हर समय क्या घटित हो रहा है। भले ही प्रकृति को सांस लेने और स्वस्थ्य होने के लिए थोड़ा समय मिल गया हो, लेकिन सर पर मंडराने वाला खतरा अभी टला नहीं है। हम अभी भी अपने चारो तरफ जंगल में भड़कने वाली आग, अचानक आई बाढ़ और ध्रुवों पर तेजी से पिघलती बर्फ देख रहे हैं।”

इस वर्सेटाइल एक्ट्रेस ने आगे बताया, “हम सभी को यह महसूस करने की जरूरत है कि क्लाइमेट चेंज वाकई हो रहा है और इस वक्त भी जारी है। हमने इसे खतरनाक नतीजे देने वाले स्तर तक बढ़ा दिया और ऐसा लगता है कि इस पर कोई लगाम ही नहीं लगाई जा रही है। अचानक आई बाढ़, सूखा, जंगल की आग, बीमारियों का प्रकोप, सामूहिक विनाश- यह सब हम देख चुके हैं। इस वैश्विक संकट के प्रति हमें अपना बुनियादी व्यवहार बदलना ही होगा।”

क्लाइमेट चेंज के गंभीर प्रभाव को लेकर भूमि भारत में जागरूकता बढ़ाने की हरचंद कोशिश कर रही हैं। उनका कहना है, “हमें पृथ्वी का संरक्षण करने और भविष्य में क्लाइमेट चेंज का असर होने के बारे में बताया गया था। लेकिन भविष्य का मतलब हमने यही कोई 400 साल बाद का वक्त समझ लिया। जबकि यह सच नहीं था, उस भविष्य का मतलब मौजूदा वक्त से था। प्रभावी और टिकाऊ संसाधन निश्चित रूप से हमारे लिए गेम चेंजर साबित होंगे। एक जागरूक और सचेत भारतीय नागरिक के रूप में मैंने सोशल मीडिया को टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकूं और क्लाइमेट कंजर्वेशन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए युवाओं तक पहुंचने के नए तरीके खोज सकूं। हम सबको क्लाइमेट वारियर बनना होगा और अपनी ताकत के मुताबिक हमें लगातार काम करना होगा।”

भूमि आगे बताती हैं, “अपने इनिशिएटिव क्लाइमेट वॉरियर के माध्यम से मैं ऐसे-ऐसे जीनियस दिमाग वालों से मिल चुकी हूं और चर्चाएं की हैं, जो बदलाव

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