Jun 29 2022 / 6:03 PM

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के साथ ही होंगे निकाय चुनाव





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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण देने को मंजूरी दे दी है। साथ ही सात दिन में आरक्षण के आधार पर अधिसूचना जारी करने के निर्देश दिए हैं। यह भी कहा कि प्रदेश में कुल आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को ट्रिपल टेस्ट की आधी-अधूरी रिपोर्ट के आधार पर बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संशोधन याचिका दाखिल की थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट को आधार बनाकर आरक्षण करने का आदेश दिया गया है।

मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अभी सुनवाई हुई है। सर्वोच्च न्यायालय ने जो आदेश दिया है, उसमें बहुत बड़ी सफलता सरकार को मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2022 के परिसीमन के आधार पर चुनाव कराने की मांग मान ली है। ओबीसी आरक्षण की मांग को भी मान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक सप्ताह के भीतर ओबीसी आरक्षण किया जाए।

कोर्ट के इस आदेश के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सत्य की जीत हुई है। आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि हमने यही कहा था कि हम चुनाव चाहते हैं और ओबीसी आरक्षण के साथ चाहते हैं। चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने पाप किया था और कांग्रेस के लोग ही सुप्रीम कोर्ट गए थे। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने हर संभव प्रयास किया और ओबीसी कमीशन बनाया। कमीशन ने व्यापक सर्वे किया और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट बनाई और वह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की।

सीएम शिवराज चौहान ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और अब चुनाव ओबीसी आरक्षण के साथ होंगे। कमलनाथ पर पलटवार किया कि जब उन्होंने ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी दिया था तो तब अदालत में क्यों सही स्थिति नहीं रखी जिससे कोर्ट ने स्टे दे दिया था। अब ओबीसी को न्याय मिला है। हम कोर्ट के फैसले से खुश हैं।

दरअसल, 10 मई के आदेश के बाद मुख्यमंत्री ने विदेश यात्रा रद्द करते हुए संशोधन याचिका दाखिल करने के लिए प्रयास तेज कर दिए थे। इस संबंध में उन्होंने खुद दिल्ली जाकर वरिष्ठ वकीलों से विचार-विमर्श किया था। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से संशोधन याचिका पर कुछ जानकारी मांगी थी, जिसके आधार पर सरकार ने मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी की निकायवार जानकारी कोर्ट के सामने रखी।

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