Sep 20 2021 / 11:39 PM

सावन शिवरात्रि 2021: जानें तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना शुरू हो चुका है। सावन के पूरे महीने भगवान भोले शंकर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कही जाता है कि जो भी सच्चे दिल से इस महीने शिव शंकर को मनाता भगवान उसकी सभी मनोकामनाएं पूरा करते हैं।

सावन माह की शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि जिन लोगों के विवाह में अड़चनें आ रही हैं, उन्हें सावन की शिवरात्रि का व्रत जरूर रखना चाहिए। इससे विवाह की अड़चनें दूर होती हैं और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जो लोग विवाहित हैं, वे इस व्रत को रहें तो उनके वैवाहिक जीवन के संकट दूर होते हैं। इस दिन की गई शिव आराधना भक्तों को सौभाग्य और आरोग्य प्रदान करने वाली होती है।

कब है सावन की शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होती है। उससे एक दिन पहले प्रदोष व्रत रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस सावन मास के चतुर्दशी तिथि 06 अगस्त दिन शुक्रवार को पड़ेगी। चतुर्दशी तिथि 06 अगस्त को शाम 06 बजकर 28 मिनट पर शुरू होकर 07 अगस्त दिन शनिवार को शाम 07 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। हालांकि शिवरात्रि का व्रत 6 अगस्त को रखा जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार शिवरात्रि के दिन निशिता काल पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। निशिता काल कुल 43 मिनट का है जो 6 अगस्त की रात 12 बजकर 06 मिनट से शुरू होकर देर रात 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। अगर आप निशिता काल में पूजा नहीं कर सकते तो इन शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं-

शाम 07:08 बजे से रात 09:48 बजे तक
रात 09:48 बजे से देर रात 12:27 बजे तक
देर रात 12:27 बजे से तड़के 03:06 बजे तक
07 अगस्त को सुबह 03:06 मिनट से सुबह 05:46 मिनट तक

7 अगस्त को होगा व्रत पारण
शिवरात्रि के व्रत का पारण उसी दिन नहीं किया जाता है। व्रत के अगले दिन किया जाता है। 6 अगस्त को सावन की मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा, ऐसे में व्रत पारण 7 अगस्त को किया जाएगा। 7 अगस्त की सुबह 05:46 मिनट से लेकर दोपहर 03:47 मिनट तक के बीच कभी भी व्रत का पारण कर सकते हैं। स्नान के बाद व्रत पारण करें और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद को दान दें।

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