Sep 17 2021 / 5:54 AM

रणजी ट्रॉफी: शिखर धवन ने हैदराबाद के खिलाफ जड़ा शतक

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नई दिल्ली। हैदराबाद के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबले में शिखर धवन का बल्ला जमकर चला। मैच के पहले दिन धवन ने नाबाद 137 रन की जबर्दस्‍त पारी खेली और उन आलोचकों को करारा जवाब दिया जो उनकी बैटिंग पर सवालिया निशान लगा रहे थे। अरुण जेटली स्टेडियम में शतकीय पारी के दौरान दिल्ली के कप्तान शिखर धवन ने बिना जल्दबाजी के, शरीर के पास से हैदराबाद के गेंदबाजों के खिलाफ दर्शनीय शॉट्स लगाए। दिन का खेल खत्म होने तक 198 गेंदों पर 137 रन बनाकर नाबाद लौटे।

खास बात यह है की धवन की यह पारी तब आई जब हैदराबाद के गेंदबाज एक छोर से लगातार अंतराल पर विकेट ले रहे थे और दिल्ली के बल्लेबाजों को अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील होने नहीं दे रहे थे। बुधवार को पहले दिन का खेल खत्म होने के समय दिल्ली का स्‍कोर छह विकेट खोकर 269 रन था। यह शतकीय पारी श्रीलंका के खिलाफ टी 20 और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में ‘गब्‍बर’ के नाम से लोकप्र‍िय धवन के मनोबल को बढ़ाने का काम करेगी।

पहले दिन के खेल की समाप्‍त‍ि के बाद धवन ने कहा, “पस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं क्योंकि सुबह गेंद हिल रही थी। धूप नहीं थी इसलिए विकेट में नमी थी। अब कम है लेकिन फिर भी नमी है। उम्मीद है जब हमें नई गेंद मिले तो हम कुछ फायदा उठा पाएं।” बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा, “जब बाएं हाथ के स्पिनर (मेहदी हसन) आए तब मैंने अपने खेल में बदलाव किया।

मैं उन पर बड़े शॉट्स खेलना चाह रहा था लेकिन पूरी परिस्थति को देखकर मैंने अपनी इच्छाओं पर काबू किया क्योंकि मेरे बाद ज्यादा बल्लेबाजी बची नहीं थी। अनुभव होने के कारण आपको अनुमान हो जाता है कि किस विकेट पर किस तरह के शॉट्स खेलने हैं। मैंने अपने शरीर से दूर से ज्यादा गेंदे नहीं खेलीं। ज्यादा ड्राइव भी नहीं मारी।

उन्होंने कहा, “जब मैं 20-21 साल का था तब मैं उस तरह के शॉट खेलता था, लेकिन अब अनुभव है इसलिए अब मैं विकेट देखता हूं और मुझे पता होता कि इस पर किस तरह के शॉट खेलने हैं।” अन्य बल्लेबाजों की विफलता पर धवन ने कहा,“उनको अच्छी गेंदें मिलीं और ऑफ स्टम्प के बाहर की गेंद पर आउट हुए।

जाहिर सी बात है कि सुबह परिस्थतियां मुश्किल थीं क्योंकि उस समय गेंद ज्यादा सीम कर रही थी और ज्यादा स्विंग भी ले रही थी। लेकिन मैं फिर भी उनकी तारीफ करूंगा जिन्होंने 25 का आंकड़ा पार किया क्योंकि वे अच्छा योगदान देकर गए।”

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