Sep 20 2021 / 11:31 PM

14 अगस्त को मनाया जाएगा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’, पीएम मोदी बोले- बंटवारे का दर्द भुलाया नहीं जा सकता

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नई दिल्ली। एक तरफ जहा देश को 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी मिली थी। भले ही देश आजादी का जश्न मना रहा था तो वहीं दूसरी ओर दर्दनाक मंजर भी सामने था। यही वही दिन था जब भारत और पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांट दिया गया था और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक अलग राष्ट्र घोषित कर दिया गया था। 14 अगस्त की तारीख को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही उन्होंने 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मनाने की भी घोषणा की।

पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों और भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है।

पीएम मोदी ने दूसरे ट्वीट में लिखा, ”#Partition Horrors Remembrance Day का यह दिन हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए न केवल प्रेरित करेगा, बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 14 अगस्त को विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने के प्रधानमंत्री मोदी के फैसले का स्वागत किया। शाह ने ट्वीट कर लिखा, ‘देश के विभाजन का घाव व अपनों को खोने के दु:ख को शब्दों में र्विणत नहीं किया जा सकता। मुझे विश्वास है कि ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ समाज से भेदभाव व द्वेष की दुर्भावना को खत्म कर शांति, प्रेम व एकता को बल देगा।’

गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि भारत के लोग, आजादी का अमृत महोत्सव मनाते हुए, देश के उन बेटों और बेटियों को सलाम करेंगे, जिन्होंने भारत के विभाजन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी थी।

इसमें कहा गया है, भारत सरकार ने विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले लोगों की याद में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में घोषित करने का निर्णय लिया है। अधिसूचना में कहा गया है, इसलिए, भारत सरकार 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में घोषित करती है ताकि भारतीयों की वर्तमान और आने वाली पीढिय़ों को विभाजन के दौरान भारत के लोगों के दर्द और पीड़ा की याद दिलायी जा सके।

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