धर्म-दर्शन

जन्माष्टमी 2020: जानें क्यों श्रीकृष्ण को चढ़ाया जाता है 56 भोग

जन्माष्टमी हिंदुओं का मुख्य त्योहाार है। इस दिन भगवान कृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं। हिंदू धर्म के मुताबिक भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के सरूप में मनाया जाता है। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 11 और 12 अगस्त 2020 को मनाई जाएगी।

बता दें कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को 56 भोग चढ़ाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि छप्पन भोग से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी कथा

कथा के अनुसार भगवान कृष्ण को मां यशोदा दिन में आठ बार यानि आठों पहर भोजन कराती थी। एक बार जब ब्रजवासियों से नाराज होकर इंद्र ने घनघोर वर्षा कर दी तो भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठा लिया। श्रीकृष्ण सात दिन गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठाए रहे इस दौरान ब्रज के लोगों, पशु पक्षियों ने गोवर्धन के नीच शरण ली। सात दिन बाद जब वर्षा समाप्त हो गई तो सभी गोवर्धन के नीच से बाहर निकले।

सात दिनों तक भगवान कृष्ण ने बिना खाएं-पीएं गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊंगली पर उठाए रखा। कृष्ण जी आठ बार भोजन करते थे। माता यशोदा और सभी ने मिलकर आठ प्रहर के हिसाब से कृष्ण जी के लिए 56 भोग बनाए। ऐसा कहा जाता है कि तभी से 56 भोग लगाने की परंपरा शुरु हुई।

बता दें कि छप्पन भोग में भगवान कृष्ण को खट्टा, मीठा, नमकीन, कड़वा और तीखें का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि इस तरह भोग लगाने से भगवान अपने भक्तों की सभी परेशानियों को हर लेते हैं।

56 भोग के बारे में एक दूसरी मान्यता है कि गो लोक में भगवान श्रीकृष्ण राधा जी के साथ एक दिव्य कमल पर विराजते हैं। उस कमल की 3 परतें हैं। इसके तहत प्रथम परत में 8, दूसरी में 16 और तीसरी में 32 पंखुड़ियां होती हैं। इस प्रत्येक पंखुड़ी पर एक प्रमुख सखी और मध्य में भगवान विराजते हैं, इस तरह कुल पंखुड़ियों की संख्या 56 है। यहां 56 संख्या का यही अर्थ है। अत: भगवान कृष्ण 56 भोग से सखियों संग तृप्त होते हैं।

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