Sep 22 2021 / 12:58 PM

मोदी सरकार ने दिया किसानों को बड़ा तोहफा, रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया

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नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2022-23 में किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल सरकार ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किए हैं। जिन्हें बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी भी मिल गई है। जिसके बाद इन नए रेट्स को मार्केट में भी जारी कर दिया गया।

सरकार की ओर से जारी किए इन नए रेट्स के मुताबिक गेहूं की एमएसपी में 40, चना की एमएसपी में 130 और सरसों की एमएसपी में सबसे अधिक 400 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। वहीं केंद्र सरकार ने रबी फसलों की एमएसपी में भी बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है।

सरकार की ओर से यह घोषणा तक की गई, जब देश के किसान तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ बीते आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसानों की मांग है कि सरकार तीनों नए कृषि कानून को वापस ले। इसके साथ ही वे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी की मांग भी कर रहे हैं। तो वहीं सरकार भी साफ कह चुकी है कि एमएसपी को खत्म नहीं किया जाएगा। तो आज एक बार फिर रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी की घोषणा हो चुकी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुए इस फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अनुराग ठाकुर ने दी है। इस दौरान उन्होंने बताया है कि रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि की कई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि गेहूं के समर्थन मूल्य में 40, जौ की एमएसपी में 35, चना में 130, मसूर व सरसों में 400 और सूर्यमुखी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 114 रुपए की बढ़ोतरी की गई है।

सरकार की ओर से जारी किए गए बयानों के मुताबिक रबी मार्केटिंग सीजन 2022-23 के लिए रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई घोषणा के अनुरूप की गई है। जिसमें यह कहा गया है कि देशभर के औसत उत्पादन को ध्यान में रखते हुए एमएसपी में कम से कम डेढ़ गुना तक का इजाफा किया जाना चाहिए। जिससे की किसानों को तर्कसंगत और उचित प्राप्त हो सके। किसान खेती में जितना खर्च करता है, उसके आधार पर होने वाले लाभ का अधिकतम अनुमान किया गया है।

सरकार कि ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में तिलहन, दलहन, मोटे अनाज के न्यूनतम समर्थन मूल्य में एकरूपता लाने के लिए संयुक्त रूप से प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। ताकि किसान इन फसलों की खेती अधिक रकबे में करने के लिए प्रोत्साहित हों सके। इसके लिए वे बेहतर प्रौद्योगिकी और खेती के तौर-तरीकों को अपनायें, ताकि मांग और आपूर्ति में संतुलन पैदा हो।

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