मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा स्टार अस्पताल संचालक डॉक्टर राजीव जैन पर की गई एफ आई आर समाप्त

23 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए डॉ राजीव जैन शिशु रोग विशेषज्ञ संचालक स्टार अस्पताल जबलपुर पर दिनांक 15 नवंबर 2021 को पुलिस प्रशासन द्वारा की गई एफआईआर को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। उन पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

यह एफ आई आर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डॉक्टर सुनीता तिवारी एफएसएल ऑफिसर द्वारा लोकल पुलिस में पदस्थ होने के कारण पुलिस ऑफीसरों से मिली भगत करके अपने प्रभाव के द्वारा दर्ज कराई गई थी।

यह बात स्पष्ट करना अति आवश्यक है कि कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान अप्रैल एवं म‌ई महीने में जब चारों तरफ लॉकडाउन लगा हुआ था एवं अफरा तफरी मची हुई थी डॉ राजीव जैन शिशु रोग विशेषज्ञ के द्वारा पीड़ित मानवता के सेवा में शहर का एकमात्र कॉविड-19 चाइल्ड सेंटर शुरू किया गया था। जिसमें अप्रैल एवं म‌ई 2021 महीने में लगभग 200 बच्चों का इलाज किया गया जिसमें से एक भी कॉविड -19 पॉजिटिव बच्चों की मृत्यु नहीं हुई थी

परंतु एक अन्य बच्ची जिसमें कोविड-19 जैसे लक्षण थे विगत 13 वर्षों से उनके इलाज में जीवित थी, उसका नाम खुशी तिवारी था, वह बच्ची पूर्व से ही मानसिक रूप से कमजोर थी, वह जन्म से ही कंजेटियल रूबेला सिंड्रोम एवं दिल में छिद्र की बीमारी, एवं आंशिक अंधेपन, एवं फेफड़ों के इन्फेक्शन से ग्रसित थी जिसकी 13 वर्ष पूर्व 2008 में डॉक्टर राजीव जैन द्वारा ही अन्य प्राइवेट बच्चों के अस्पताल में जान बचाई गई थी। उसकी मृत्यु पर आज भी अस्पताल को सभी कर्मचारियों को दुख एवं सहानुभूति है।

बच्ची खुशी तिवारी कोविड 19 की दूसरी लहर के दौरान अति गंभीर अवस्था मे रात्रि 11:00 बजे स्टार अस्पताल ला लाई गई थी भरती के समय उसका दिल काम नहीं कर पा रहा था ,ब्लड प्रेशर अत्यधिक कम था , फेफड़ों में गंभीर इंफेक्शन था, एलडीएच एवं डी डाइमर समान्य से अधिक थे, यह सभी परिस्थितिया कोविड-19 जैसी जटिलता को प्रदर्शित करती है ऐसी स्थिति में इलाज के दौरान बच्ची माता-पिता के द्वारा अस्पताल स्टाफ के मना करने के बावजूद पानी पिलाने से सांस की नली में चोकिंग के कारण बच्चे की मृत्यु हो गई थी।

डॉ राजीव जैन द्वारा सभी जीवन रक्षक प्रयास किए गए थे, परंतु बच्ची की जान नहीं बचाई जा सकी थी। बच्ची की माता एफ एस एल ऑफिसर होने के बावजूद भी बिना पोस्टमार्टम के शव को ले गई थी एवं मृत्यु के 10 दिन बाद उनके द्वारा लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत कराई गई थी, शिकायतकर्ता श्रीमती सुनीता तिवारी के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं एफएसएल ऑफिसर होने के कारण पुलिस प्रशासन द्वारा अपने अधिकारी का समर्थन करते हुए डॉक्टर राजीव जैन पर केस दर्ज कर दिया था। जबकि इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर द्वारा की गई जांच में उचित दिशा में इलाज किया जा रहा है इस तरह की रिपोर्ट आई थी।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा पूरे मुद्दे पर दोनों पक्ष की दलीलें सुनी गई एवं गहन विचार करने के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि इस तरह का कोई आरोप एवं एफ आईआर डॉक्टर राजीव जैन पर नहीं बनता है एवं उनके द्वारा कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान मानवता की सेवा में यथासंभव प्रयास किया गया था। ऐसी स्थिति में उन पर लगे सभी आरोपो को समाप्त करते हुए सभी प्रकार की प्रक्रियाएं जो इस शिकायत से संबंधित चल रही हैं को पूरी तरह विराम दे दिया है।

माननीय हाई कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया है कि मृत्यु एक कटु सत्य है जिसे सभी को स्वीकार करना चाहिए यदि इसी प्रकार मृत्यु होने पर शिकायतों से डॉक्टर पर केस दर्ज होते रहेंगे तो आने वाले समय में डॉक्टर सीरियस मरीजों का कभी भी इलाज नहीं कर पाएंगे एवं उन्हें इलाज देने से हमेशा डरेंगे।

पीड़ित मानवता की सेवा के लिए सीरियस मरीजों का इलाज देने के लिए डॉक्टर को प्रेरित करने के लिए माननीय हाईकोर्ट ने आज ऐतिहासिक निर्णय किया है। यह बताना अति आवश्यक होगा कि इस मामले में पैरवी एडवोकेट वरिष्ठ एडवोकेट श्री अनिल खरे एवं एडवोकेट सत्येंद्र जैन एवम एडवोकेट अमिताभ भारती द्वारा की गई है।

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