Sep 21 2021 / 2:01 PM

‘कुपोषण छोड़ पोषण की ओर, थामें क्षेत्रीय भोजन की डोर‘ नारे के साथ छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति के लिए साझा प्रयास

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पोषण और स्वच्छता जागरूकता के लिए सभी विभाग हुए एकजुट
राष्ट्रीय पोषण माह में समन्वित प्रयासों के लिए आयोजित हुई बैठक

रायपुर। कुपोषण एवं एनीमिया कमी लाने के उद्देश्य से प्रदेश में एक से 30 सितम्बर तक जन-आंदोलन के रूप में राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान की सफलता और लोगों में पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता के साझा प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की अगुवाई में कई विभाग और संस्थाएं एकजुट हुए। बैठक के पोषण पखवाड़े के दौरान आयोजित किये जाने वाले कार्यक्रमों की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा वर्चुअल माध्यम से सभी जिलों के महिला एवं बाल विकस अधिकारियों, रिसोर्स और प्रशिक्षण सेंटर के अधिकारियों को मैदानी स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों के संचालन और सूक्ष्म कार्ययोजना के लिए मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के साथ सभी विभागों ने ‘कुपोषण छोड़ पोषण की ओर,थामें क्षेत्रीय भोजन की डोर‘ नारे के उद्घोष के साथ समन्वित प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट की।

बैठक में बताया गया कि पोषण पखवाड़े में हर हफ्ते अलग-अलग थीम आधारित कार्यक्रम आयोजित होंगे। पहले हफ्ते पोषण वाटिका का विकास, दूसरे सप्ताह में पोषण हेतु योग एवं आयुष, तीसरे सप्ताह हाई बर्डन जिलों के आंगनबाड़ियों में हितग्राहियों को पोषण किट और सामग्री का वितरण और चौथे सप्ताह गंभीर कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन एवं उन्हें पौष्टिक आहार वितरण के लिए अभियान का संचालन किया जाएगा। सभी विभाग मिलकर जनसमुदाय में पोषण और स्वच्छता संबंधी जागरूकता और उनमें व्यवहार परिवर्तन के लिए काम करेंगे। इसके लिए अधिकारियों को अधिक से अधिक जन-प्रतिनिधियों का सहयोग लेने भी कहा गया है।

स्वस्थ्य जीवन के लिए योग की महती भूमिका को देखते हुए पोषण अभियान में योग को भी शामिल किया गया है। अभियान के दौरान आयुष विभाग और योग आयोग के सहयोग से किशोरियों, महिलाओं, गर्भवती स़्ित्रयों को योगासन सिखाए जाएंगे। इससे गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए सहायता मिलेगी। इस दौरान लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहयोग से स्वच्छ जल उपलब्धता पर भी जोर दिया जाएगा। विभाग के अधिकारी ने बताया कि जिन आंगनबाड़ियों तक स्वच्छ जल की पहुंच नहीं है,उसे पूरा किया जाएगा। जिन आंगनबाड़ियों में नल लगे हैं वह पंचायतों में दी गई किट के माध्यम से पानी की जांच करवा सकते हैं। दूषित जल पाये जाने की स्थिति में जिला स्तर पर लैब के लिए सैंपल भेजे जाएंगे। स्वच्छ जल से कई प्रकार की बीमारियों से बच्चों को दूर रखा जा सकता है। इसके साथ ही पंचायत विभाग के माध्यम से ग्राम, जनपद और जिला तीनों स्तर पर पोषण पंचायतों का आयोजन कर लागों तक पोषण संबंधी जानकारी और आहार पहुंचाए जाएंगे। इस दौरान तीज, गणेश चतुर्थी त्यौहारों को भी पोषण और स्वास्थ्य गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

स्कूलों में नारा लेखन, निबंध, स्लोगन, रंगोली और व्यंजन की विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को प्रसव पूर्व जांच, गर्भावस्था तथा स्तनपान के दौरान पोषण और एनीमिया पर परामर्श दिया जाएगा। कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें चिकित्सकों के पास उचित मार्गदर्शन और पोषण पुनर्वास केन्द्रों में स्वास्थ्य सुधार के लिए भेजा जाएगा। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कृषि, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, नगरीय प्रशासन, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, पोषण आहार बोर्ड, श्रम विभाग, आयुष विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य औषधि पादप बोर्ड, यूनिसेफ सहित कई संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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