Oct 26 2021 / 10:46 AM

भारत ने पूरे विश्व को ‘अधिकार और अहिंसा’ का मार्ग सुझाया: पीएम मोदी

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नई दिल्ली। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28वें एनएचआरसी स्थापना दिवस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सबसे पहले राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 28वें स्थापना दिवस की बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि, ये आयोजन आज ऐसे समय हो रहा है, जब हमारा देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि, हमने सदियों तक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया। एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में अन्याय-अत्याचार का प्रतिरोध किया। एक ऐसे समय में जब पूरी दुनिया विश्व युद्ध की हिंसा में झुलस रही थी, भारत ने पूरे विश्व को ‘अधिकार और अहिंसा’ का मार्ग सुझाया। हमारे बापू को देश ही नहीं बल्कि पूरा विश्व मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों के प्रतीक के रूप में देखता है।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लिए मानवाधिकारों की प्रेरणा का, मानवाधिकार के मूल्यों का बहुत बड़ा स्रोत आज़ादी के लिए हमारा आंदोलन, हमारा इतिहास है। उन्होंने कहा कि हमने सदियों तक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया। एक राष्ट्र के रूप में, एक समाज के रूप में अन्याय-अत्याचार का प्रतिरोध किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि जो गरीब कभी शौच के लिए खुले में जाने को मज़बूर था, उब गरीब को जब शौचालय मिलता है, तो उसे प्रतिष्ठा भी मिलती है। उन्होंने कहा कि जो गरीब कभी बैंक के भीतर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था उस गरीब का जब जनधन अकाउंट खुलता है, तो उसमें हौसला आता है, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

पीएम मोदी ने कहा कि दशकों से मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ क़ानून की मांग कर रही थीं। हमने ट्रिपल तलाक के खिलाफ क़ानून बनाकर, मुस्लिम महिलाओं को नया अधिकार दिया है। भारत ने लगातार विश्व को समानता और मानव अधिकारों के जुड़े विषयों पर नया विजन दिया है। बीते दशकों में ऐसे कितने ही अवसर विश्व के सामने आए हैं, जब दुनिया भ्रमित हुई है, भटकी है। लेकिन भारत मानवाधिकारों के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहा है, संवेदनशील रहा है।

भारत आत्मवत सर्वभूतेषु के महान आदर्शों, संस्कारों और विचारों को लेकर चलने वाला देश है। आत्मवत सर्वभूतेषु यानि जैसा मैं हूं वैसे ही सब मनुष्य हैं। मानव-मानव में, जीव-जीव में भेद नहीं है। ये हम सभी का सौभाग्य है कि आज अमृत महोत्सव के जरिए हम महात्मा गांधी के उन मूल्यों और आदर्शों को जीने का संकल्प ले रहे हैं। मुझे संतोष है कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग भारत के इन नैतिक संकल्पों को ताकत दे रहा है, अपना सहयोग कर रहा है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के 28वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने 28 साल में 20 लाख से ज्यादा मामलों का निस्तारण किया है और 205 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा जिनके साथ अन्याय हुआ था उन्हें दिलाने का काम किया है।

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