Oct 26 2021 / 12:12 PM

जीवन में सरलता का महत्व, सदगी ही जीवन की सुंदरता है..

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मिस्टर एंड मिस आइकॉन मध्यप्रदेश के फिनाले में 2021 की मिस आइकॉन मध्य प्रदेश दीपिका मीनाक्षी वीनर हुई है।

जब मेरी बातचीत दीपिका मीनाक्षी से हुई तब पता चला कि सरलता और सादगी में ही सुंदरता छुपी होती है ,ना कि केवल सुनदर दिखने में जिस विचारों से वह चलती है आज की 21वीं सदी की युवा पीढ़ी में यह बहुत ही कुचित देखने मिलता है। (कम देखते है हर घर में यदी एक ऐसी बेटी हो या ऐसे विचारों की एक महिला हो तो हर घर में पूर्णता अभी भी बढ सकती है। इतने से समय में और इस उम्र में अपने से ज्यादा दुसरे जरूरतमंद लोगों के बारे में सोचना और उनके साथ टाइम गुजार कर देखना कि वह लोग कैसे जिंदगी जीते हैं, यह निस्वार्थ प्रेम हर किसी के बस की बात नहीं होती दीपिका मीनक्षी का कहाना ऐसा है कि वह हर तरहा की जीममेदारी पूर्ण करना चाहते हैं ,जो मेरी माता ने मुझे जन्म दिया है ,यह दुनिया दिखाई है अगर मैं उनके सपनों को भी पूरा ना कर पाऊं तो मेरे जीवन का कैसा अर्थ पूरा जीवन ही उनका दिया हुआ है मां के आशीर्वाद से अपने लाइफ में मुझे और काफी कुछ करना है।

इंदौर शहर में मिस आइकॉन मध्य प्रदेश
कॉम्पिटिशन हुआ और मैं भाग्यशाली हूं कि मां अहिल्या की नगरी में प्रथम स्थान मिला। हमेशा एक बात बचपन से ही मेरे जहन में रहा करती थी, मां का सपना था मैं एक दिन पूरे देश में जानी जाऊं और उनका यह सपना मैंने अपना उद्देश्य बनाया। और उसी के लिए मैं प्रयास कर रही हूं। इंदौर मुझे बहुत अच्छा लगा, यह राजमाता अहिल्या देवी बाई होलकर का शहर है और अहिल्या माता महाराष्ट्रीयन का गौरव हैं और उन्हें प्रेरणास्रोत माना जाता है। हमारे स्वभाव कि कहे तो मुझे सरलता से जीवन जीना बड़ा अच्छा लगता है और वैसे भी हमें हमारा जन्मदिन वृद्ध आश्रम की माताओं के साथ और अनाथ आश्रम के बच्चों के साथ मनाना हमे बहुत अच्छा लगता है। उन लोगों के चेहरे की हंसी देखकर मुझ मे भी एक अलग ही ऊर्जा निर्माण होती है, मैं पॉजिटिव हो जाती हूं और फिर से अपने मंजील की और मुस्कुराते हुए निकल पड़ती हूं। एक समय ऐसा भी है कि जब मैं उन लोगों से मिलने जाती तो मुझे उन लोगों के जीवन का अनुभव खुद लेना चाहती थी उन माताओं के साथ रहकर या अनाथ आश्रम के बच्चों के साथ पल बीता कर, मुझे बड़ा ही अच्छा लगता था ,मैं अनुभव ना चाहती थी इसीलिए कुछ दिन मैंने उस जीवन का भी अनुभव लेना जरूरी समझा और कुछ समय तक उनके साथ टाइम बिताने का निर्णय लिया और आज मैं जो भी हूं इन सब के पीछे मेरी सारी माताओं का आशीर्वाद और मेरे अनाथालय के बच्चों की शुभेच्छा ए कायम मेरे साथ रही है और मैं उन लोगों की उम्मीदें हमेशा पूरी करने का प्रयास करूंगी।

मेरी मां ने भी मुझसे यही कहा था कि तुम्हारा जीवन ही सामाजिक कार्य के लिए बना है। बेटा मेरे अपने जीवन का लक्ष्य है मैं जो भी आय अर्जित करूं उसमें से अधिकांश हिस्सा अनाथ आश्रम एवं वद्धाश्रम की जरूरतें पूरी कर सकूं। साथ ही माताओं की सेवा कर सकूं और उन्हें खुश देखकर आत्मशांति के अनुभव को महसूस करती हूं। यदि मैं अपने आधे से आधा बांटकर भी खा लूं तो मुझे लगता है आज मेरा दिन बन गया।

कुछ पंक्तियों के माध्यम से यह बात कहना है –

सख्त से सख्त राहों में भी जिंदगी का सफर आसाना लगता है, मैं जहां भी हूं, जो भी मैंने पाया है, वह मुझे मेरी मां की दुआओं का असर लगता है।

यह बात हमेशा मेरे जहन रहती है कि मेरी मां मेरे साथ हैं। मैंने अपने जीवन में निर्णय लिया है कि मुझे बस अपनी मां का सपना पूरा करना है इसलिए मैंने यह फिल्ड चुनी है। मैं एक कहना चाहूंगी फिल्ड कोई भी हो अगर आपके इरादे नेक है और आपका दिल साफ है आप अच्छे कार्य कर रहे हो तो जो भी करें पूरे आत्मविश्वास के साथ करें।

मैं जिस गांव से हूं वहां लड़कियों को इतनी आजादी अभी भी नहीं है ,कि वो फैशन की फील्ड चुने। जब मुझे अपनी मां का सपना पूरा करने का पूरा प्रयास करना है, उस गांव की लड़कियों के लिए भी पे्ररणा होगी और उन्हें भी लगेगा की जब दीपिका मीनाक्षी यह कार्य कर सकती है तो हम क्यों नहीं। सबको प्रेरणा मिले ताकि सब एक मुकाम हासिल कर सके। अगर मेरे प्रेरणा से एक भी मेरे देश की बेटी प्रेरित होती है तो मैं अपने कार्य में सफल हूं। शास्त्रीय संगीत नृत्य हमने अपनी मां से ही सीखा था मेरा जीवन मेरी मां को समर्पित है।

मैं मांगती हूं मन्नत की फिर यही जहां मिले, फिर वही गोद मिले, और फिर वही मां मिले
टीवी पर संगीत का कार्यक्रम आता था तब मां कहती थी मेरी बेटी को भी मैं टीवी पर ऐसे देखना चाहती हूं, तब मैं वह बात सुनती थी तो मुझे बचपन से ही यह ख्याल बना रहा और मैंने मां को छोटी उमर मे ही खोया, लेकिन मां की सभी इच्छाओं को अपने पास रखा, मैं हमेशा तैयार हूं और एक दिन उनकी सभी इच्छाओं को जरूर पूरा करूंगी। मैंने जीवन की शुरूआती दौर से ही संघर्षों का सामना किया है मेरा जीवन आम लोगों की तरह कभी भी आसान नहीं रहा, जॉब करने के लिए भी रोजाना 6किलोमीटर पैदल सफर किया है। इन कठिन हालातों के बावजूद भी कभी हिम्मत नहीं हारी, हर पल मां के साथ होने का अहसास मुझे रहा। देश की सभी बेटियों से कहना चाहूंगी कि अपने मां-पिता के लिए आप कुछ ऐसा काम करो जिससे वे आप पर नाज करें और साथ वह गर्व से कह सके कि मेरी बेटी मेरे वंश का दिया है मेरे घर की लक्ष्मी है।

सफलता और विफलता ईश्वर के हाथ है। हमारे पास है तो सिर्फ कर्म करने की शक्ति उसे पूरी श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ करें। मेरा विश्वास है कि मैं अपने मां का सपना पूरा करूं, ताकि मां को यह बता सकूं कि मां मैंने आपका सपना पूरा किया।

हमारे मां की कुछ सीख हमे अच्छी तरह से याद है उनका कहना था कि बेटा तुम्हें जब दुख होता है तो तुम्हारे आंख में आंसू आते हैं, तो तुम्हें उस दर्द का एहसास है। इसीलिए तुम्हारी वजह से किसी के भी आंखों में आंसू नहीं आने देना उस बात का दर्द तुम्हें पता है तुम्हारी वजह से किसी का दिल दुखाना नहीं चाहिए। इस बात का हमेशा ध्यान रखना इससे बड़ा पाप दुनिया में कोई भी नहीं है।

चलती-फिरती आंखों से अजां देखी है, मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है

मेरा पहला कर्तव्य है कि हम अपनी मां का सपना पूरा करें और हमारा सपना है की हम सामाजिक कार्य के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और माताओं की सेवा करें। और अनाथ आश्रम के बच्चों को उनके हिस्से की खुशियां देने का प्रयास करेंगे. यह थी दीपिका मीनाक्षी के जीवन की कहानी हमने कुछ शब्दों में कैद कर ली।

मिस्टर एंड मिस आइकॉन मध्य प्रदेश की कॉम्पिटीशन में एक बात कही जाए तो जब दीपिका मीनाक्षी विजेता हुई, तब उनका फोटो सेशन चल रहा था। तो उसी दौरान एक महिला वहां से गुजर रही थी और साइड में कुछ लाइट्स या किसी चीज में उनका पैर फंसा और वह महिला गिर गए तो उसी समय दीपिका की नजर उस महिला पर गई. और उन्होंने अपना फोटो शूट अपनी ट्रॉफी सब छोड़ कर उस महिला की मदद करना इसको पहला महत्व दिया. तो यहीं पर इंसान की इंसानियत दिखती है, कि जिस सपने को पूरा करने के लिए इंसान दिन-रात इतना जूझ रहा है और वह सपने के करीब होकर भी वह किसी आम इंसान की पीड़ा को देख नहीं सकता। वह अपनी कामयाबी को साइड में रख कर किसी का दुख दर्द समझने के लिए उसकी सहायता कर रहा है। तो यह सब देख कर वहां के जो भी सीनियर थे ,उन लोगों को अहसास हुआ कि जो भी आज विजेता हुई है, जिसे हमने सही चुना है वही उसकी हकदार है। इंसानियत से बढ़कर आज भी इस दुनिया में बड़ा कार्य कोई नहीं है। इस बात को लेकर दीपिका इस 21वीं सदी की पीढ़ी के लिए संस्कार की नई मिसाल है। मिस आॅइकॉन इंडिया से उन्हें कॉल भी आया है कि आप नेशनल कॉम्पिटिशन के लिए चयनित हैं। आपको नेक्स्ट लेवल के लिए अपने आप को तैयार करना है, ईश्वर करे आप अपनी मां का सपना जरूर पूरा करें।

सब की शुभकामनाएं आपके साथ है दीपिका मीनाक्षी।

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