Oct 26 2021 / 10:09 AM

स्वाभाविक तौर पर मेरा झुकाव तीखी और बेचैन करने वाली पटकथाओं की तरफ होता है: आयुष्मान खुराना

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युवा बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना थिएटरों पर आठ बैक टू बैक हिट देने के बाद भारत में कंटेंट सिनेमा के पोस्टर बॉय बन गए हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी इस अभिनेता ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बनने वाली सर्वश्रेष्ठ पटकथाएं चुनने की उत्सुकता हमेशा दिखाई है।

पाथ-ब्रेकिंग फिल्म-मेकर श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित ‘अंधाधुन’ की तीसरी वर्षगांठ पर आयुष्मान ने इस इंटरटेनर में काम देने के लिए डायरेक्टर का शुक्रिया अदा किया! बता दें कि यह फिल्म देश में चर्चा का विषय बन गई थी।

आयुष्मान कहते हैं, “मैं धारदार और लीक से हट कर लिखी गई स्क्रिप्ट की ओर खिंचा चला जाता हूं। ‘अंधाधुन’ में हर चीज का कॉम्बिनेशन मौजूद था। यह ताजगी भरी, अनूठी और एक पाथ-ब्रेकिंग फिल्म थी। श्रीराम राघवन हमारे देश के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में गिने जाते हैं और मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे उनके साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर मिला।“

आयुष्मान ने आगे बताया, “मैंने उनके विजन और उनकी महारत के सामने हथियार डाल दिए थे और मुझे गर्व है कि ‘अंधाधुन’ मेरी फिल्मोग्राफी का हिस्सा बनी। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसने मुझे बहुत कुछ अनलर्न करने और काफी कुछ लर्न करने के लिए प्रेरित किया। एक अंधे पियानो वादक की भूमिका निभाना कोई खाने का काम नहीं था।”

आयुष्मान ने खुलासा किया कि फिल्म के लिए तैयारी की प्रक्रिया और पूरी शूटिंग के दौरान श्रीराम ने उनकी उंगली थामे रखी। इसी का नतीजा था कि वह ऐसा शानदार प्रदर्शन कर सके, जिसने उनको प्रतिष्ठित नेशनल फिल्म अवार्डस में बेस्ट एक्टर का अवार्ड दिलाया।

उनका मानना है- “अगर श्रीराम सर जैसा विजनरी शख्स मेरी उंगली न थामे होता, तो मैं इस किरदार को इतनी प्रामाणिकता के साथ नहीं निभा सकता था। इस फिल्म को गढ़ने में पूजा लाढ़ा सुरती (को-राइटर और एडीटर) के जादू को क्रेडिट देना ही होगा। मैं अपने पियानो कोच अक्षय वर्मा का भी शुक्रगुजार हूं।”

‘अंधाधुन’ के दौरान एक आर्टिस्ट के रूप में आयुष्मान को तगड़ी चुनौती महसूस हुई और इसी के चलते उन्हें स्क्रीन पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली।

आयुष्मान स्वीकार करते हैं- “मैं पूरी तरह से डायरेक्टर का एक्टर हूं और ‘अंधाधुन’ ने मुझे पहले से बेहतर एक्टर बना दिया। इसने मुझे एक आर्टिस्ट के रूप में हमेशा खुद को चुनौती देना और रचनात्मक रूप से एक बेचैन आत्मा बनना सिखाया। ‘अंधाधुन’ मेरे लिए रचनात्मक रूप से सर्वाधिक संतुष्टि देने वाली फिल्म थी, क्योंकि इसने मुझे उन्मुक्त होकर खुद को अभिव्यक्त करने की आजादी दे रखी थी। मुझसे मेरा ही अनजान पक्ष परदे पर उतरवा लेने का पूरा क्रेडिट श्रीराम सर को जाता है। मुझे इस मास्टरपीस का हिस्सा बनाने के लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूं।“

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