Dec 01 2021 / 11:29 PM

Diwali 2021: जानें दीवाली पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा, शुभ मुहूर्त, महत्व और विधि

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देशभर में दिवाली का त्योहार बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ये त्योहार न सिर्फ हिंदू धर्म में खास है बल्कि अन्य धर्म के लोग भी इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दिन खास तौर पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, देवी सरस्वती, महाकाली की पूजा की जाती है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। कहते हैं जो भी इस दिन सच्चे मन से पूजा करता है उसके सभी दूखों का अंत होता है। तो चलिए आपको बताते हैं दिवाली पर क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और विधि-

पूजा विधि-

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा से पहले पूरे घर को अच्छे से साफ कर लें। इसके बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें।

दिवाली के मौके पर घर को अच्छे से सजाएं। इस दिन आपको घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनानी चाहिए।

जहां पूजा की जाती है उस स्थान पर एक चौकी रखें। इसपर लाल कपड़ा बिछाकर वहां देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें।

अब इस चौकी के पास जल से भरा कलश रख दें।

अब माता लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा पर तिलक लगाएं और उनकेसामने घी का दीपक जलाएं।

दीपक जलाकर उन्हें जल, मौली,गुड़, हल्दी, चावल, फल, अबीर-गुलाल आदि चढ़ाना चाहिए।

अब आपको देवी सरस्वती, मां काली, श्री हरि और कुबेर देव की विधि विधान से पूजा करें।

महालक्ष्मी पूजा के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरणों की पूजा करनी चाहिए।

आखिर में मां लक्ष्मी की आरती उतारें और उन्हें मिठाई का भोग लगाएं।

अब पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद को घर-परिवार के सभी सदस्यों में बांट दें।

पूजा मुहूर्त-

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल मुहूर्त – 06:09 PM से 08:04 PM
लक्ष्मी पूजा निशिता काल मुहूर्त – 11:39 PM से 12:31 AM, नवम्बर 05
अमावस्या तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 04, 2021 को 06:03 AM बजे
अमावस्या तिथि समाप्त – नवम्बर 05, 2021 को 02:44 AM बजे

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का महत्व-

दिवाली के दिन शाम और रात को पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कार्तिक मास की अमावस्या की रात को देवी लक्ष्मी खूद धरती पर आती हैं और हर घर में जाती है। इस दौरान जो घर साफ-सुथरा और प्रकाशवा होता है। मां लक्ष्मी वहीं ठहर जाती है। यही कारण है कि दिवाली के आते ही घरों में सफाई का काम शुरू हो जाता है। जिससे की मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सके। दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी के साथ ही कुबेर देवता की पूजा भी होती है।

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