Holi 2024: होली पर क्यों और कैसे मनाते हैं धुलेंडी

Holi 2024: होलिका दहन के बाद होली के दिन धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है। कई राज्यों में इसे होली कहते हैं। धुलेंडी को धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन और चैत बदी आदि नामों से जाना जाता है। होली के अगले दिन धुलेंडी को पानी में रंग मिलाकर होली खेली जाती है तो ...

Mar 22, 2024 - 05:29
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Holi 2024: होली पर क्यों और कैसे मनाते हैं धुलेंडी

Holi 2024

holi festival Holi 2024: होलिका दहन के बाद होली के दिन धुलेंडी का पर्व मनाया जाता है। कई राज्यों में इसे होली कहते हैं। धुलेंडी को धुरड्डी, धुरखेल, धूलिवंदन और चैत बदी आदि नामों से जाना जाता है। होली के अगले दिन धुलेंडी को पानी में रंग मिलाकर होली खेली जाती है तो रंगपंचमी को सूखा रंग डालने की परंपरा रही है। कई जगह इसका उल्टा होता है।

 

क्यों मनाते हैं धुलेंडी :

  • कहते हैं कि त्रैतायुग के प्रारंभ में विष्णु ने धूलि वंदन किया था। इसकी याद में धुलेंडी मनाई जाती है।
  • धूल वंदन अर्थात लोग एक दूसरे पर धूल लगाते हैं।
  • यह भी कहते हैं कि इस दिन से ब्रज में श्रीकृष्ण ने 'रंग उत्सव' मनाने की परंपरा का प्रारंभ किया था।
  • तभी से इसका नाम फगवाह हो गया, क्योंकि यह फागुन माह में आती है। 
  • कृष्ण ने राधा पर रंग डाला था। श्रीकृष्ण ने ही होली के त्योहार में रंग को जोड़ा था।

Lunar Eclipse on Holi 2024

Lunar Eclipse on Holi 2024

कैसे मनाते हैं धुलेंडी :

1. पहले यह होता था कि धुलेंडी के दिन सुबह के समय लोग एक दूसरे पर कीचड़, मिट्टी, मुलतानी मिट्टी या धूल लगाते थे, जिसे धूल स्नान कहते हैं।  पुराने समय में शाम के समय धुलेंडी के दिन टेसू के फूलों का रंग बनाकर एक दूसरे पर लगाया जाता था। अब यह नहीं होता है।

 

2. इस दिन लोग एकजुट होकर अपने परिचितों या समाजजनों के उन घरों में रंग डालने जाते हैं जहां पर किसी की मृत्यु हो गई हो और उस घर की यह पहली होली हो। घर में रंग डालकर सभी को सूखा गुलाल लगाकर घर में गमी के माहौल को खत्म कर खुशी का माहौल बनाया जाता है। इससे घर का शुद्धिकरण भी होने की मान्यता है।

 

3. इस दिन ढोल बजा कर होली के गीत गाए जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहनकर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं।

 

3. ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। गले मिलकर एक दूसरे को मिठाइयां खिलाते हैं।

 

4. राग-रंग के बाद कुछ लोग भांग खाते हैं और कुछ लोग भजिये या गुझिया बनाकर ठंडाई का मजा लेते हैं। गुझिया होली का प्रमुख पकवान है जो कि मावा (खोया) और मैदा से बनती है और मेवाओं से युक्त होती है इस दिन कांजी के बड़े खाने व खिलाने का भी रिवाज है।

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