Sep 21 2021 / 1:58 PM

Hartalika Teej 2021: हरतालिका तीज व्रत कल, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। अखंड सौभाग्य और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए महिलाएं हरतालिका तीज व्रत रखती हैं। विवाह योग्य युवतियां सुयोग्य वर की कामना से भी हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। अखंड सौभाग्य और सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए महिलाएं हरतालिका तीज व्रत रखती हैं। इस व्रत को सभी व्रतों में कठिन माना जाता है क्योंकि यह निर्जला व्रत होता है। इस व्रत के दौरान पानी भी नहीं पीना होता है। विवाह योग्य युवतियां सुयोग्य वर की कामना से भी हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं।

हरतालिका तीज व्रत के दिन माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की आराधना की जाती है। हरतालिका तीज व्रत उत्तर भारत के कई स्थानों पर रखा जाता है। हरतालिका तीज व्रत के लिए विशेषकर मायके से महिलाओं के लिए नए कपड़े, फल, मिठाई, सुहाग की सामग्री आदि बेटी के घर भेजी जाती है।

हरतालिका तीज 2021 तिथि

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 8 सितंबर दिन बुधवार को देर रात 02 बजकर 33 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि 09 सितंबर को रात 12 बजकर 18 मिनट पर समाप्त हो रही है। ऐसे में उदया तिथि 09 सितंबर को प्राप्त है, इसलिए हरतालिका तीज का व्रत 09 सितंबर दिन गुरुवार को रखा जाएगा।

हरतालिका तीज 2021 पूजा मुहूर्त

हरतालिका तीज के दिन पूजा के लिए दो मुहूर्त हैं। एक सुबह के समय में और दूसरा प्रदोष काल में सूर्यास्त के बाद।

सुबह का मुहूर्त: हरतालिका तीज की प्रात: पूजा के लिए आपको 02 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। आप इस दिन प्रात: 06 बजकर 03 मिनट से सुबह 08 बजकर 33 मिनट के मध्य पूजा करना उत्तम है।

प्रदोष पूजा मुहूर्त: हरतालिका तीज की प्रदोष पूजा के लिए शाम को 06 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 51 मिनट तक मुहूर्त है।

हरतालिका तीज व्रत पूजा विधि

प्रदोष काल में पूजा करना काफी शुभफल दायक होती है। सूर्यास्त के बाद मुहूर्त को प्रदोषकाल कहते हैं। इसमें दिन और रात का मिलन होता है।

-हरतालिका पूजा के लिए सबसे पहले काली गीली मिट्टी से अपने हाथों से गूंदकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं।

-फिर मूर्ति को फूलों से सजे चौकी पर रखें। ध्यान रहें इस चौकी में लाल कपड़ा अवश्य बिछा हुआ होना चाहिए। भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा के साथ भगवान गणेश को भी स्थापित करें।

-इसके बाद सभी देवी-देवताओं का आह्रान करते हुए पूजा आरंभ करें।

-हरतालिका तीज में प्रयोग की जानी वाली सभी पूजन सामग्रियों को एक-एक करके भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करें।

-आरती करें और कथा सुनें।

हरतालिका तीज व्रत कथा

हिमवान की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत पर अन्न त्याग कर घोर तपस्या शुरू कर दी थी। इस बात से पार्वती जी के माता-पिता काफी चिंतित थे। तभी एक दिन देवर्षि नारद जी राजा हिमवान के पास पार्वती जी के लिए भगवान विष्णु की ओर से विवाह का प्रस्ताव लेकर पहुंचे। माता पार्वती शिव से विवाह करना चाहती थी अतः उन्होंने यह शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

पार्वतीजी ने अपनी एक सखी को अपनी इच्छा बताई कि वह सिर्फ भोलेनाथ को ही पति के रूप में स्वीकार करेंगी। सखी की सलाह पर पार्वतीजी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की आराधना की। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था।

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