Sep 22 2021 / 2:21 PM

4 दिन तक मनेगा छठ पर्व, जानें छठ पूजा तिथि व मुहूर्त

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छठ पूजा भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार बिहार, उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में और नेपाल के भी कुछ भागों में मनाया जाता है। ये त्योहार कार्तिका महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू होता है। ये त्योहार चार दिनों तक चलता है। छठ पर्व सूर्य देवता को समर्पित है। परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति में सुधार की कामना से महिलाएं ये व्रत करती हैं।

छठ पर्व व्रत के दौरान भगवान सूर्य के उदय और अस्त होते समय अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही गंगा और अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर ये त्योहार मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ को सूर्य देवता की बहन माना जाता है। छठ पूजा से घर में सुख शांति और संपन्नता आती है।

छठ पूजा कब

छठ पूजा में अस्तगामी और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। वैसे तो साल में दो बड़े अवसरों पर सूर्यदेव की आराधना और पूजा पाठ करने का विधान होता है। पहला चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी और दूसरा कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को। छठ पूजा चार दिनों तक चलता है। छठ पूजा में व्रती महिलाएं अपने लिए छठी मइया से सूर्य जैसा प्रतापी और यश को प्राप्त करने वाली संतान की प्रार्थना करती हैं।

छठ पूजा के चार दिन

छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय-
छठ पूजा की शुरुआत कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को नहाय खाय के साथ होती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्नान कर और नये कपड़े पहनकर शाकाहारी भोजन लेते हैं।

छठ पूजा का दूसरा दिन खरना-
अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल की पंचमी तिथि को व्रत रखा जाता है। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। शाम को चाव व गुड़ से खीर खाया जाता है। चावल का पिठ्ठा व घी लगी रोटी भी खाई प्रसाद के रूप में वितरीत की जाती है।

छठ पूजा का तीसरा दिन सूर्य षष्ठी-
सूर्य षष्ठी पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन बांस की टोकरी में प्रसाद और फल सजाये जाते हैं। इस टोकरी सभी व्रती सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तालाब, नदी या घाट आदि पर जाते हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की आराधना की जाती है।

छठ पूजा का चौथा दिन समापन-
फिर अगले दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी को भी पूजा और अर्घ्य दिया जाता है और प्रसाद बांट कर छठ पूजा संपन्न की जाती है।

कौन हैं देवी षष्ठी
छठ देवी सूर्य देव की बहन है। पौराणिक ग्रंथों में भगवान श्री राम के अयोध्या आने के बाद माता सीता के साथ मिलकर कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना की थी। इसके अलावा महाभारत काल में कुंती द्वारा विवाह से पूर्व सूर्योपासना से पुत्र की प्राप्ति से भी इसे जोड़ा जाता है। इसी कारण लोग सूर्यदेव की कृपा पाने के लिये भी कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्योपासना करते हैं।

छठ पूजा बिहार में क्यों है सबसे ज्यादा प्रचलित
छठ पर्व बिहार का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। यह मुख्य रूप से बिहारवासियों का पर्व है। इसके पीछे कारण यह है कि इस पर्व की शुरुआत अंगराज कर्ण से माना जाता है। अंगप्रदेश वर्तमान में भागलपुर में है जो बिहार में स्थित है।

अंगराज कर्ण के विषय में कथा है कि, यह पाण्डवों की माता कुंती और सूर्य देवकी संतान है। कर्ण अपना आराध्य देव सूर्य देव को मानते थे।अपने राजा की सूर्य भक्ति से प्रभावित होकर अंगदेश के निवासी सूर्यदेव की पूजा- उपासना करने लगे। धीरे-धीरे सूर्य पूजा का विस्तार पूरे बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र तक हो गया।

छठ पूजा तिथि व मुहूर्त
2 नवंबर 2019
छठ पूजा के दिन सूर्योदय – सुबह 6 बजकर 33 मिनट
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 35 मिनट

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