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क्लाइमेट चेंज समिट में बोले पीएम मोदी- कार्बन उत्सर्जन में 45 फीसद की कमी का संकल्प लेना जरूरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दुबई गए हुए हैं। सम्मेलन के लिए पीएम मोदी और अन्य विश्व नेता एकत्र हुए। शुक्रवार को शिखर सम्मेलन आरंभ होने पर सभी नेता एक दूसरे से मिलें।

पीएम मोदी को इटली की पीएम जियोर्जिया मेलोनी और यूरोपीय संघ के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन समेत कई विश्व नेताओं के साथ बातचीत करते देखा गया। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय भी शामिल हुए। उन्होंने सभी नेताओं के साथ एक फैमिली फोटो भी खिंचवाई। सीओपी28 समिट में अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक गंभीर समस्या है।

उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन में 45 फीसद की कमी का संकल्प लेना जरूरी है। उन्होंने अगला सम्मेलन भारत की मेजबानी में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा। पीएम मोदी ने कहा, भारत जलवायु परिवर्तन प्रक्रिया के लिए संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क के प्रति प्रतिबद्ध है। इसीलिए इस मंच से, मैं 2028 में भारत में सीओपी33 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने का प्रस्ताव रखता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटने को लेकर सबकी भागीदारी होनी जरूरी है। उन्होंने कहा, आज भारत ने इकोलॉजी और अर्थव्यवस्था के उत्तम संतुलन का उदाहरण पूरी दुनिया के सामने रखा है। भारत पूरी दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी ग्लोबल कार्बन एमिशन में हमारी हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम ही है। उन्होंने कहा कि भारत 2030 तक गैर जीवाश्म ईंधन का शेयर बढ़ा देगा। इसे 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि हम 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत विश्व की कुछ खास अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह राष्ट्रीय स्तर पर तय योगदान का लक्ष्य पूरा करने की राह पर है। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन से जुड़े लक्ष्यों को देश 11 साल ही प्राप्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि गैर जीवाश्म ईंधन का लक्ष्य भारत वक्त से पहले ही हासिल कर चुका है।

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