Sep 22 2021 / 2:28 PM

मुस्लिम पक्ष की पैरवी करने वाले वकील राजीव धवन को अयोध्या केस से हटाया

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नई दिल्ली। सुन्नी वक्फ बोर्ड और मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को अयोध्या विवाद मामले से हटा दिया गया है। इसके चलते वे अयोध्या मामले में दायर की गई समीक्षा याचिकाओं में हस्तक्षेप नहीं कर पाएंगे। अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए मंगलवार को धवन ने बताया, मुझे अयोध्या मामले में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एजाज मकबूल ने बाबरी केस से हटाया है।

एजाज पहले जमियत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। मुझे जानकारी मिली थी कि जमियत-ए-हिंद के मदनीजी ने संकेत किया था कि मेरी तबियत ठीक नहीं है। यह पूरी तरह बकवास है। धवन ने आगे बताया, उनके पास अधिकार है कि वे अपने वकील एजाज मकबूल को मुझे अयोध्या मामले से हटाने का आदेश दें, लेकिन मुझे निकालने के लिए जो कारण बताया जा रहा है वह झूठा और दुर्भावनापूर्ण है। मैंने बिना किसी संकोच के खुद को हटाए जाने की मंजूरी का औपचारिक पत्र भेज दिया है।

सोमवार को मौजूद न होने के कारण उनका नाम हटाया गया
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के इस बयान पर जमीयत के वकील एजाज मकबूल ने कहा, यह कहना गलत है कि समीक्षा याचिका से राजीव धवन को उनकी तबियत की वजह से हटाया गया है। असल बात यह है कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद स्वंय पुनर्विचार याचिका दाखिल करना चाहता था। सोमवार को मौजूद न होने के कारण याचिका में उनका नाम नहीं दिया गया, यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं।

न्यायालय के फैसले में हैं कई त्रुटियां
न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ सोमवार को पहली पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। जमीयत के महासचिव मौलाना सैयद अशद रशीदी की ओर से यह याचिका दाखिल की गई है। इस पर उन्होंने कहा- न्यायालय ने जो फैसला सुनाया है उसमें कई त्रुटियां हैं और संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा सकती है। बता दें कि रशीदी मूल याचिकाकर्ता एम सिद्दीक के कानूनी उत्तराधिकारी हैं।

9 नवंबर को राम मंदिर के पक्ष में सुनाया गया फैसला
उल्लेखनीय है कि अयोध्या भूमि विवाद पर लगातार 40 दिनों की सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय में 5 न्यायाधीशों की पीठ ने 9 नवंबर को राम मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया था। न्यायालय ने फैसले के तहत कहा था- विवादित जमीम पर राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा। इस मंदिर के लिए केंद्र सरकार 3 महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाएगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था।

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