क्या कहता है आज का भविष्यफल

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 12-07-2019 / 9:42 AM
  • Update Date: 12-07-2019 / 9:42 AM

आज का पंचांग-
कलियुगाब्द…………………….5121

विक्रम संवत्……………………2076

शक संवत्………………………1941

मास……………………………आषाढ़

पक्ष………………………………शुक्ल

तिथी…………………………एकादशी

रात्रि 12.33 पर्यंत पश्चात द्वादशी

रवि………………………….उत्तरायण

सूर्योदय………..प्रातः 05.49.03 पर

सूर्यास्त………..संध्या 07.15.00 पर

चंद्रोदय…………दोप 03.17.19 पर

चंद्रास्त…………रात्रि 01.59.31 पर

सूर्य राशि……………………….मिथुन

चन्द्र रशि…………………………तुला

नक्षत्र…………………………विशाखा

दोप 03.54 पर्यंत पश्चात अनुराधा
योग……………………………..साध्य

प्रातः 06.12 पर्यंत पश्चात शुक्ल
करण…………………………..वणिज

दोप 12.46 पर्यंत पश्चात विष्टि
ऋतु………………………………ग्रीष्म

दिन……………………………शुक्रवार

आंग्ल मतानुसार –
12 जुलाई सन 2019 ईस्वी।

☸ तिथि विशेष –
देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी –

पद्मा (आषाढ़ शुक्ल) –

चातुर्मास प्रारम्भ –
पुराणों के अनुसार चार माह (श्रावण, भादव, अश्विन एवं कार्तिक) के लिए विष्णु भगवान क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं। तीनों लोकों के स्वामी होने की वजह से भगवान का शयनकाल संपूर्ण संसार का शयनकाल माना जाता है।

देवशयनी या हरिशयनी एकादशी या देशज भाषा में देवसोनी ग्यारस आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनाई जाती है। चूँकि एकादशी व्रत भगवान विष्णु की आराधना का व्रत है, इसलिए देवसोनी व देवउठनी एकादशियों का विशेष महत्व है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का चार माह का समय हरिशयन का काल समझा जाता है।

वर्षा के इन चार माहों का संयुक्त नाम चातुर्मास्य दिया गया है। इसके दौरान जितने भी पर्व, व्रत, उपवास, साधना, आराधना, जप-तप किए जाते हैं उनका विशाल स्वरूप एक शब्द में ‘चातुर्मास्य’ कहलाता है। चातुर्मास से चार मास के समय का बोध होता है और चातुर्मास्य से इस समय के दौरान किए गए सभी व्रतों/ पर्वों का समग्र बोध होता है।

पुराणों में इस चौमासे का विशेष रूप से वर्णन किया गया है। भागवत में इन चार माहों की तपस्या को एक यज्ञ की संज्ञा दी गई है। वराह पुराण में इस व्रत के बारे में कुछ उदारवादी बातें भी बताई गई हैं। उदाहरण के लिए, इस व्रत को आषाढ़ शुक्ल एकादशी के स्थान पर द्वादशी (बारस) या आषाढ़ी पूर्णिमा से भी शुरू किया जा सकता है और चार माह पूर्ण करने के लिए इसका समापन उधर कार्तिक शुक्ल द्वादशी या कार्तिक पूर्णिमा तक किया जा सकता है।

संभवत: यह दृष्टिकोण इसलिए समाहित किया गया होगा क्योंकि यात्रा के दौरान किसी निश्चित स्थान पर पहुँचने में विलंब हो सकता है। उस युग में आज की तरह यात्रा के साधन नहीं थे, इसलिए यह विचार शुमार किया गया होगा। चूँकि चौमासे के व्रत में एक ही स्थान पर रहना आवश्यक है, इसलिए इस परिप्रेक्ष्य में उपरोक्त तथ्य सारगर्भित लगता है।

शास्त्रों व पुराणों में इन चार माहों के लिए कुछ विशिष्ट नियम बताए गए हैं। इसमें चार महीनों तक अपनी रुचि व अभीष्ठानुसार नित्य व्यवहार की वस्तुएँ त्यागना पड़ती हैं। कई लोग खाने में अपने सबसे प्रिय व्यंजन का इन माहों में त्याग कर देते हैं। चूँकि यह विष्णु व्रत है, इसलिए चार माहों तक सोते-जागते, उठते-बैठते ‘ॐ नमो नारायणाय’ के जप की अनुशंसा की गई है।

इन चार माहों के दौरान शादी – विवाह, उपनयन संस्कार व अन्य मंगल कार्य वर्जित बताए गए हैं। पुराणों के अनुसार चार माहों के लिए विष्णु भगवान क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं। तीनों लोकों के स्वामी होने की वजह से भगवान का शयनकाल संपूर्ण संसार का शयनकाल माना जाता है। चार मास की अवधि के पश्चात देवोत्थान एकादशी को भगवान जागते हैं।

☸ शुभ अंक……………………3
शुभ रंग……………आसमानी

राहुकाल –
प्रात: 10.52 से 12.32 तक।

दिशाशूल –
पश्चिमदिशा – यदि आवश्यक हो तो जौ का सेवन कर यात्रा प्रारंभ करें।

उदय लग्न मुहूर्त –
मिथुन
04:00:32 06:13:51

कर्क
06:13:51 08:29:40

सिंह
08:29:40 10:41:08

कन्या
10:41:08 12:51:25

तुला
12:51:25 15:05:41

वृश्चिक
15:05:41 17:21:29

धनु
17:21:29 19:26:47

मकर
19:26:47 21:13:38

कुम्भ
21:13:38 22:46:57

मीन
22:46:57 24:17:53

मेष
24:17:53 25:58:20

वृषभ
25:58:20 27:56:37

✡ चौघडिया –
प्रात: 07.32 से 09.12 तक लाभ
प्रात: 09.12 से 10.51 तक अमृत
दोप. 12.31 से 02.11 तक शुभ
सायं 05.30 से 07.10 तक चंचल
रात्रि 09.51 से 11.11 तक लाभ ।

आज का मंत्र –
|| ॐ नागचंद्रेश्वराय नमः ||

संस्कृत सुभाषितानि –
यस्मिन् वंशे समुत्पन्नः तमेव निजचेष्टितै: ।
दूषयत्यचिरेणैव धुणकीट इवाधम: ॥

अर्थात –
उधई की तरह अधम मानव जिस कुल में पैदा हुआ हो उसे अपने हि कृत्य से थोडे समय में दूषित करता है।

आरोग्यं सलाह –

काली मिर्च से कई बीमारियों का खात्मा-
1. फैट कम करे –
काली मिर्च और गुनगुना पानी शरीर में बढ़ा हुआ फैट कम करता है। साथ ही यह कैलोरी को बर्न करके वजन कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा जुकाम होने पर काली मिर्च गर्म दूध में मिलाकर पीने से आराम मिलता है। इसके अलावा जुकाम बार-बार होता है, छीकें लगातार आती हैं तो काली मिर्च की संख्या एक से शुरू करके रोज एक बढ़ाते हुए पंद्रह तक ले जाएं फिर प्रतिदिन एक घटाते हुए पंद्रह से एक पर आएं। इस तरह जुकाम की परेशानी में आराम मिलेगा।

2. कब्ज दूर करे –
कब्ज के रोगियों के लिए पानी के साथ काली मिर्च का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक कप पानी में नींबू का रस और काली मिर्च का चूर्ण और नमक डालकर पीने से गैस व कब्ज की समस्या कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है।

आज का राशिफल –
राशि फलादेश मेष –
(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)
आज का दिन सामान्य है। कार्यक्षेत्र में मजबूती रहेगी। आय में भी निरंतरता बनी रहेगी एवं वृद्धि होगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अधिक क्रोध एवं विवाद से बचें। माता की बातों का सम्मान करें एवं उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें। साझेदारी में सामंजस्य बनाकर रखें।

राशि फलादेश वृष –
(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
छोटे भाई-बहनों से मतभेद हो सकते हैं। आज के दिन माता का आशीर्वाद प्राप्त करें। माता की सलाह से आपकी चिंता दूर होगी। ससुराल में कोई धार्मिक या मांगलिक कार्य होने की संभावना है। आज के दिन वाहन सावधानी से चलाएं, दुर्घटना के योग बनते हैं।

राशि फलादेश मिथुन –
(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
मन में किसी बात को लेकर असमंजस रहेगा। दिमाग स्थिर रहेगा। संतान के किसी विशेष कार्य को लेकर धन खर्च हो सकता है जिसके कारण मन में तनाव रहेगा। आज के दिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें, पेट संबंधी कोई तकलीफ हो सकती है।

राशि फलादेश कर्क –
(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
आज का दिन आपके लिए शुभ है। आज आपको किसी प्रकार की बड़ी खुशखबरी मिल सकती है जिससे आपका मन प्रसन्न रहेगा। स्थायी संपत्ति के योग अच्छे बनते हैं। मामा पक्ष में कोई मांगलिक कार्य हो सकता है।

राशि फलादेश सिंह –
(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
आज आपके मन में तनाव रहेगा। माता का सम्मान करें और उनकी सलाह मानें। माता से विवाद न करें। संतान के विचार सुनें। संतान की समस्या सुनने एवं उसको हल करने का प्रयास करें। स्थायी संपत्ति को लेकर विवाद हो सकता है।

राशि फलादेश कन्या –
(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
आज आप बहुत प्रभावशाली रहेंगे। छोटे भाइयों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। माता की सलाह मानें, आपको लाभ प्राप्त होगा। जीवनसाथी से आपके मधुर संबंध बने रहेंगे। एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ेगा। परिवार के साथ कहीं भ्रमण पर जा सकते हैं।

राशि फलादेश तुला –
(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
धार्मिक कार्यों में धन खर्च होगा। आज आपका मन तनावपूर्ण रहेगा। सुख-सुविधा के कार्यों में धन खर्च होगा। किसी बात को लेकर बड़े भाई-बहनों से विवाद हो सकता है। कार्यक्षेत्र में अस्थिरता बनी रहेगी। चिंता के कारण मन में उत्साह की कमी महसूस होगी।

राशि फलादेश वृश्चिक –
(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
आज आपकी कोई महत्वपूर्ण इच्छा पूर्ण हो सकती है। आज आपको सम्मान प्राप्त होगा। रुका हुआ धन पुन: मिलने के योग हैं। स्थायी संपत्ति के अच्छे योग बनते हैं। जीवन में सुख-सुविधाएं प्राप्त होंगी। संतान से प्रेम एवं सम्मान प्राप्त होगा।

राशि फलादेश धनु –
(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)
मन में असंतोष बना रहेगा। व्यर्थ के चिंताजनक विचार मन में आते रहेंगे। सिर से संबंधित रोग हो सकता है। घर में किसी बात को लेकर विवाद हो सकता है। संतान और आपके विचार किसी विषय पर अलग होने से मतभेद हो सकता है।

राशि फलादेश मकर –
(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)
आज माता का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें। माता के भाग्य से आपको सुख-संपत्ति एवं धन का लाभ प्राप्त होगा। घर में कोई मांगलिक कार्य होने के योग हैं। संतान के कहीं बाहर जाने के योग हैं। पिताजी का सहयोग प्राप्त होगा।

राशि फलादेश कुंभ –
(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आज मन में व्यर्थ की चिंता रहेगी। मन में अस्थिरता रहेगी तथा निर्णय लेने में असमंजस बना रहेगा। संतान का समय बहुत प्रभावशाली है अत: संतान की सलाह मानें एवं विवाद न करें। गुप्त शत्रुओं का प्रभाव रहेगा तथा स्वास्थ्य में भी परेशानी रहेगी।

राशि फलादेश मीन –
(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
आज आपके मन में प्रसन्नता रहेगी। रुके हुए कार्य बनते जाएंगे। पहले दिया हुआ धन पुन: मिलने के योग हैं। संतान का शुभ समय है। माता के भाग्य से लाभ प्राप्त होगा। जीवनसाथी एवं संतान का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।

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