LAC पर हालात बेकाबू, 45 साल बाद चीन के सैनिकों ने की गोलीबारी

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 08-09-2020 / 5:03 PM
  • Update Date: 08-09-2020 / 5:03 PM

नई दिल्ली। भारत और चीन की सीमा पर मई से जारी तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। सोमवार देर रात पैंगॉन्ग त्सो झील पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास भारत और चीन के सैनिकों में गोलीबारी की घटना हुई है। हालांकि, इस फायरिंग में किसी को निशाना नहीं बनाया गया। ऐसे में जहां दोनों देश बातचीत से मसला सुलझाने की बात कर रहे हैं, तब LAC पर हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।

वहीं, इस घटना के बाद अब चीन ने एक बार फिर भारत पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है। चीनी सरकार का कहना है कि भारतीय सेना ने गैरकानूनी तरीके से एलएसी पार की और पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे में घुस आए। भारतीय सैनिकों ने ही पहले गोली चलाई। जवाब में चीनी सेना को जबरन फायरिंग करनी पड़ी। जानकारी के मुताबिक फिलहाल हालात कंट्रोल में है।

उधर, चीन से जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर आज चार दिवसीय रूस यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। वहां विदेश मंत्री शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेंगे। 10 सितंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री याग यी के बीच मॉस्को में बातचीत होने वाली है। इससे पहले शुक्रवार को ही सीमा को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री वेई फेंग के बीच मॉस्को में बातचीत हुई थी।

भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर तनाव कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। सोमवार देर रात दोनों देशों के बीच 45 साल बाद फायरिंग की घटना हुई। बता दें कि LAC पर फायरिंग की घटना इससे पहले 1975 में अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर हुई थी, जहां चीनी सैनिकों ने विश्वासघात करते हुए भारतीय जवानों पर गोलियां बरसाईं थीं जिसमें 4 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।

इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने पर जोर दिया गया और 1993 में एक अहम समझौता किया गया। ये समझौता तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की चीन यात्रा के दौरान किया गया था। हालांकि, इस समझौते के बाद भी चीन और भारत के बीच दो अहम समझौते हुए। इस समझौते की मूल भावना भी सीमा पर शांति ही थी, जिसके लिए कुछ स्पेसिफिक बिंदु भी जोड़े गए।

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