खतरे में देशभर के लाखों छात्रों का भविष्य – खत्‍म हुए 35 यूनिवर्सिटीज के ओपन कोर्स

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 14-08-2018 / 9:37 PM
  • Update Date: 14-08-2018 / 9:37 PM

नई दिल्ली। यूजीसी ने 35 स्टेट और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज द्वारा कराए जा रहे डिस्टेंस लर्निंग कोर्सेस की मान्यता रद्द कर दी है। इससे देशभर में लाखों छात्रों का भविष्य अधर में फंस गया है। यूजीसी के फैसले को वापस लेने के लिए संस्थानों को एक महीने का समय दिया गया है। इसी बीच उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा। यूजीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 5 सालों से नियमित रूप से यूनिवर्सिटीज जिन कोर्सेस का संचालन नहीं कर रही हैं, उसकी मान्यता रद्द होगी।

साथ ही प्रोफेशनल कोर्स जैसे एमबीए, एमसीए, बीएड, होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म आदि के लिए संबंधित रेग्युलेटरी अथॉरिटी से पहले मंजूरी लेनी होगी, उसके बाद ही मान्यता दी जाएगी। कोर्स को रद्द किए जाने के भय से कई यूनिवर्सिटीज ने आॅफर किए जाने वाले प्रोग्राम्स की संख्या घटा दी है क्योंकि वे अनुपालन की जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं।

महाराष्ट्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। मुंबई यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट आॅफ डिस्टेंट एंड ओपन लर्निंग, शिवाजी यूनिवर्सिटी, मराठावाड़ा यूनिवर्सिटी और महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी की मान्यता खत्म हुई है। इसके अलावा यशवंतराव चाह्वान महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी को 38 यूजी और पीजी प्रोग्राम्स में से सिर्फ 17 में दाखिले की अनुमति मिली है।

मुंबई यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट आॅफ डिस्टेंट एंड ओपन लर्निंग के निदेशक डी. हरिचंदन ने कहा कि मुंबई यूनिवर्सिटी एक स्वायत्त संस्था है और हमारे कोर्सेस को हमारी ऐकडेमिक काउंसिल मान्यता देती है, हमारे कोर्सेस की मान्यता खत्म करने वाला यूजीसी कौन है?

यह है नियम
यूजीसी द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक किसी संस्थान को यूजीसी से मान्यता लेने के लिए तीन माह में पहले एनएएसी से मान्यता लेनी होगी। तीन महीने के अंदर एनएएसी से मान्यता नहीं मिलती है तो यूजीसी से भी मान्यता नहीं मिलेगी। इग्नू के मुताबिक प्रोफेशनल कोर्स में दो या तीन अन्य प्रोग्राम को जोड़ने को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन है।

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