आज इन सात राशियों का भाग्य संवारेंगे शनि देव, खत्म करेंगे सारी परेशानियां, करें शनि चालीसा का पाठ

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 13-07-2019 / 12:04 PM
  • Update Date: 13-07-2019 / 12:04 PM

आज शनिवार के दिन भगवान शनि की पूजा आराधना की जाती है। शनि की कृपा जिस के जीवन में बनती है उसके जीवन से हर बाधा का अंत होता है। शनि जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं शनि की कृपा से जीवन में आ रही बाधा का अंत होता है। शास्त्रों में शनि का न्याय का देवता माना गया है, शनि कर्मफलदाता है। क्म के आधार पर इनका दण्डविधान चलता है। आज इन सात राशियों का भाग्य संवारेंगे शनि देव। शनिदेव की चालीसा के पाठ से शनि देव को प्रसन्न किया जा सकता है।

इन राशियों का संवारेंगे भाग्य-
मेष
आज ग्रह स्थिति आपकी सोच को कुछ भ्रमित कर सकती है और आप अनिश्चित, स्वच्छंद और जिद्दी हो सकते हैं। आप शत्रु की कूटनीति के शिकार हो सकते हैं। व्यावसायिक एवं आर्थिक संदर्भ में आयी आकस्मिक परेशानी के कारण आप परेशान और तनाव की स्थिति में रह सकते हैं।

यदि आपको अपनी आंखों की दृष्टि से कोई असुविधा है, तो आपको चिकित्सकीय नेत्र संबंधी सलाह लेना श्रेयकर रहेगा। आपके परिवार के सदस्यों के साथ संबंध तनाव में आ सकते हैं। जिसके लिए आप दुखी महसूस कर सकते हैं।

वृष
इस अवधि के दौरान परिवर्तन और आत्मनिरीक्षण ही सफलता की कुंजी हैं। आज आपको गुणवत्ता और प्रदर्शन पर जोर देना होगा। आपके गहरे और गहन विचार आपको सभी समस्याओं के मूल में कटौती करने में मदद करेंगे।

हालांकि पिछली साझेदारियां आपके लिए बड़ी निराशा हो सकती हैं, फिर भी कोई भी नया कार्य आपके पक्ष में जाने की संभावना है। पारिवारिक सदस्यों के प्रति अपने व्यवहार से सावधान रहें। विवाह संबंधित रिश्ता तय करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें।

मिथुन
आज भागीदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इस कारण आप बेचैन और अनिश्चित हो सकतें है। आर्थिक पक्ष अस्थिर हो सकता है। व्यवसायी एवं व्यापारी वर्ग का सार्वजनिक समर्थन हासिल करने के लिए अथक प्रयास करने पड़ सकते हैं।

आपके आलोचक और शत्रु आपके लिए समस्याएं पैदा करेंगे, वह आप पर हावी हो सकते हैं। किन्तु आप कूटनीति के प्रयोग से उन्हें चुप करा सकते हैं। आपका दैनिक कार्यक्रम व्यस्त रहेगा। नौकरीपेशा जातक पूर्व में अपने द्वारा किये गए शुभ कृत्यों के लिए आज मान्यता प्राप्त करेंगे व अपने संपर्कों को भी बढ़ा पाएंगे।

कर्क
यह आपके लिए बाधाओं और मुश्किल से निपटने के लिए एक कठिन समय है। आज कार्य स्थल पर दूसरों की आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने से बचें। अपने लक्ष्यों को प्राथमिकताओं दें। दूसरों से उपहार प्राप्त करने का यह अच्छा समय है। लंबे समय से लंबित मुकदमेबाजी और अदालती मामले आपके पक्ष में सुलझेंगे।

जो लोग नौकरी की तलाश कर रहे हैं, उन्हें एक मौका मिलेगा। पारिवारिक एवं सामाजिक संदर्भ में आप किसी भी गलती के लिए सवालों के घेरे में आएंगे। छात्रों को विवरणों पर अधिक ध्यान देना होगा। बच्चे जीवन में अच्छा करेंगे और अच्छी प्रगति दिखाएंगे। स्वास्थ्य शुभ रहेगा।

सिंह
आज स्थिति कुछ खराब रह सकती है। स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है, फलस्वरूप कामों को सही ढंग से करने में आप स्वयं को थका हुआ महसूस कर सकते हैं। खान-पान पर संयम रखकर आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर रख सकते हैं।

आप किसी दूर की यात्रा पर जा सकते हैं। कामों में सफलता मिलेगी। आर्थिक लाभ के अवसर मजबूत होंगे। आपकी सुख-सुविधाओं की वृद्धि होगी। किन्तु घरेलू मामलों में सावधानी से काम लें।

कन्या
कार्य व्यापार अच्छा रहेगा, किन्तु आर्थिक रूप में दिन कुछ उठापटक वाला रह सकता है। नौकरीपेशा जातकों को कार्यस्थल पर कामों में सफलता मिलेगी। छोटी-मोटी यात्राएं भी हो सकती हैं।

गृहस्थ जीवन को लेकर कुछ चिंताएं रह सकती हैं। हालांकि ये बड़ी चिंताएं नहीं होंगी। स्वास्थ्य अनुकूल रहेगा। किन्तु इस समय माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखना जरूरी होगा।

तुला
आज आप में से कुछ को आपके भागीदार या किसी करीबी सहयोगी से समस्या हो सकती है। व्यवसाय संबंधित यात्राएं वांछित परिणाम नहीं दे पाएंगी। नए कार्यस्थल से जुड़ने या नई परियोजनाओं और उपक्रमों को शुरू करने के लिए दिन ज्यादा अनुकूल नही है। कार्यस्थल पर किसी से झगड़े और टकराव से बचने की कोशिश करनी चाहिए।

प्रेमपूर्ण संपर्क यदि कोई हो, तो यह एक बुरा मोड़ ले सकता है। आप में से कुछ लोग बदनामी और अपमान का शिकार हो सकते हैं। पारिवारिक परिवेश आज आप में से कुछ को भावनात्मक रूप से परेशान कर सकता है। जीवनसाथी या संतान के स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ चिंता हो सकती है।

वृश्चिक
आज का दिन मिश्रित प्रभाव प्रदान करने वाला है। आपके पास नए अवसर होंगे और उनका उपयोग करके प्रचुर लाभ प्राप्त कर पाएंगें। आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है।

किन्तु पारिवारिक जीवन की उथल-पुथल, परिवारिक सदस्यों का बिगड़ता स्वास्थ्य और संपत्ति के मामलों पर विवाद आपको निरंतर तनाव में रखेंगे। आप आंखों या कानों को प्रभावित करने वाली कुछ छोटी बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं।

शनिदेव की चालीसा-

दोहा
जय-जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महराज।
करहुं कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज।।

चौपाई
जयति-जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला।।
चारि भुजा तन श्याम विराजै।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै।।
परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला।।
कुण्डल श्रवण चमाचम चमकै।
हिये माल मुक्तन मणि दमकै।।
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल विच करैं अरिहिं संहारा।।
पिंगल कृष्णो छाया नन्दन।
यम कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन।।
सौरि मन्द शनी दश नामा।
भानु पुत्रा पूजहिं सब कामा।।
जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं।
रंकहु राउ करें क्षण माहीं।।
पर्वतहूं तृण होई निहारत।
तृणहंू को पर्वत करि डारत।।
राज मिलत बन रामहि दीन्हा।
कैकइहूं की मति हरि लीन्हा।।
बनहूं में मृग कपट दिखाई।
मात जानकी गई चुराई।।
लषणहि शक्ति बिकल करि डारा।
मचि गयो दल में हाहाकारा।।
दियो कीट करि कंचन लंका।
बजि बजरंग वीर को डंका।।
नृप विक्रम पर जब पगु धारा।
चित्रा मयूर निगलि गै हारा।।
हार नौलखा लाग्यो चोरी।
हाथ पैर डरवायो तोरी।।
भारी दशा निकृष्ट दिखाओ।
तेलिहुं घर कोल्हू चलवायौ।।
विनय राग दीपक महं कीन्हो।
तब प्रसन्न प्रभु ह्नै सुख दीन्हों।।
हरिशचन्द्रहुं नृप नारि बिकानी।
आपहुं भरे डोम घर पानी।।
वैसे नल पर दशा सिरानी।
भूंजी मीन कूद गई पानी।।
श्री शकंरहि गहो जब जाई।
पारवती को सती कराई।।
तनि बिलोकत ही करि रीसा।
नभ उड़ि गयो गौरि सुत सीसा।।
पाण्डव पर ह्नै दशा तुम्हारी।
बची द्रोपदी होति उघारी।।
कौरव की भी गति मति मारी।
युद्ध महाभारत करि डारी।।
रवि कहं मुख महं धरि तत्काला।
लेकर कूदि पर्यो पाताला।।
शेष देव लखि विनती लाई।
रवि को मुख ते दियो छुड़ाई।।
वाहन प्रभु के सात सुजाना।
गज दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना।।
जम्बुक सिंह आदि नख धारी।
सो फल ज्योतिष कहत पुकारी।।
गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।
हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं।।
गर्दभहानि करै बहु काजा।
सिंह सिद्धकर राज समाजा।।
जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारै।
मृग दे कष्ट प्राण संहारै।।
जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।
चोरी आदि होय डर भारी।।
तैसहिं चारि चरण यह नामा।
स्वर्ण लोह चांदी अरु ताम्बा।।
लोह चरण पर जब प्रभु आवैं।
धन सम्पत्ति नष्ट करावैं।।
समता ताम्र रजत शुभकारी।
स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी।।
जो यह शनि चरित्रा नित गावै।
कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै।।
अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।
करैं शत्राु के नशि बल ढीला।।
जो पंडित सुयोग्य बुलवाई।
विधिवत शनि ग्रह शान्ति कराई।।
पीपल जल शनि-दिवस चढ़ावत।
दीप दान दै बहु सुख पावत।।
कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।
शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा।।

दोहा
प्रतिमा श्री शनिदेव की, लोह धातु बनवाय।
प्रेम सहित पूजन करै, सकल कष्ट कटि जाय।।
चालीसा नित नेम यह, कहहिं सुनहिं धरि ध्यान।
नि ग्रह सुखद ह्नै, पावहिं नर सम्मान।।

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