आज है शनि जयंती, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 22-05-2020 / 12:30 PM
  • Update Date: 22-05-2020 / 12:30 PM

शनि जयंती को भगवान शनि के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस बार शनि जयंती ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अमावस्या को यानि 21 मई को पड़ रही है। इस दिन सच्चे मन से पूजा पाठ करने से व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होगी शनि देव उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे। शनि को क्रूर और कठोर ग्रह माना जाता है जो सिर्फ बुरे फल देता है, मगर ऐसा नहीं है शनि न्याय करने वाले देवता हैं। शनि लोगों को उनके कर्म के अनुसार फल देते हैं, अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा।

माना जाता है कि शनि जयंती के दिन उन लोगों को शनि देव की पूजा अवश्य करनी चाहिए जिनपर शनि की साढे़साती, ढैय्या आदि शनि दोषों का प्रकोप चल रहा हो। जानते हैं शनि जयंती की तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि और इस दिन किन कामों को करने की मनाही होती है।

शनि जयंती तिथि

हर वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस साल शनि जयंती 22 मई, शुक्रवार को पड़ रही है।

शनि जयंती मूहूर्त

मावस्या तिथि आरंभ – 21 मई 2020 को रात्रि 9 बजकर 35 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त – 22 मई 2020 रात्रि 11 बजकर 7 मिनट पर

शनि जयंती की पूजा विधि

दूसरे देवी देवताओं की तरह ही शनि देव की पूजा होती है। शनि जयंती के दिन आप उपवास भी रख सकते हैं। भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नानादि कर लें। इसके बाद लकड़ी के एक पाट पर काले रंग का साफ़ वस्त्र बिछा लें। नया कपड़ा न हो तो आप साफ़ काला वस्त्र रख लें। अब इस पर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। अगर ये नहीं है तो आप एक सुपारी रखकर उसके दोनों तरफ शुद्ध घी और तेल का दीप जलाएं।

अब धुप जलाएं। अब शनि के इस स्वरूप को पंचगव्य, पंचामृत, इत्र आदि से स्नान करा लें। अब कुमकुम, सिंदूर, अबीर, काजल, गुलाल आदि के साथ नीले या काले फूल देव को चढ़ाएं। इसके साथ ही इमरती और तेल से बनी चीजें अर्पित करें। आप श्री फल के साथ दूसरे फल भी अर्पित कर सकते हैं। पूजन की इस प्रक्रिया के बाद शनि मंत्र की एक माला का जप करें। फिर शनि चालीसा का पाठ करें। अब शनिदेव की आरती उतार कर पूजा संपन्न करें।

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