पीएनबी घोटाले के बाद केंद्र सरकार ने बैंकों को दिए ये निर्देश

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 13-03-2018 / 9:26 AM
  • Update Date: 13-03-2018 / 9:26 AM

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 12,672 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के बाद केंद्र सरकार ने बैंकों के लिए एहतियातन नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत 50 करोड़ से ज्यादा का ऋण लेने वालों को अब अपने पासपोर्ट की डिटेल बैंक को देनी होगी। ताकि अगर कोई फ्रॉड सामने आए तो बैंक वक्त रहते संबंधित अथॉरिटी को सूचना दे पाएं और आरोपी को विदेश भागने से पहले पकड़ा जा सके।

गौरतलब है कि पीएनबी घोटाले में आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप का मालिक मेहुल चौकसी जनवरी में देश छोड़कर भाग चुके हैं। इससे पहले शराब कारोबारी विजय माल्या भी बैंकों का 9000 करोड़ कर्ज चुकाए बगैर लंदन भाग गया था।

वित्त मंत्रालय के सचिव राजीव कुमार ने ट्वीट इस आदेश की जानकारी दी। उनका कहना है कि सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक, बैंकों के लिए यह जरूरी है कि वो 50 करोड़ से ज्यादा के कर्जधारकों से अगले 45 दिन में उनके पासपोर्ट की पूरी जानकारी जमा करा लें।

भगोड़ों के खिलाफ बिल पास
1 मार्च को केंद्रीय कैबिनेट ने फ्यूजिटिव इकोनॉमिक आॅफेंडर्स बिल को मंजूरी दी थी। इसका मकसद आर्थिक अपराध कर विदेश भागने वाले आरोपियों के खिलाफ कानून बनाना है। प्रस्तावित कानून में भगौड़ों की प्रॉपर्टी जब्त करने और इनकी बिक्री को आसान बनाया जाएगा।

इसकी जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार फ्रॉड रोकने के लिए प्रयासरत है और इस बिल के लागू होने के बाद फ्रॉड करके आरोपी विदेश नहीं भाग पाएंगे। साथ ही, जांच एजेंसियों को ज्यादा अधिकार देने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, बैंकिंग सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए वित्त मंत्रालय सभी बैंकों को संभावित फ्रॉड से बचने के लिए 50 करोड़ से ज्यादा के एनपीए की जानकारी सीबीआई को देने का निर्देश दे चुका है।

फिलहाल डिटेल शेयर होने में लगता है वक्त
फिलहाल, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि बैंक कर्जदारों से उनके पासपोर्ट की जानकारी लें। ऋण नहीं चुकाने या इसमें गड़बड़ी के खुलासे के बाद वो फायदा उठाकर आसानी से देश छोड़कर भाग जाते हैं। बैंक और संबंधित एजेंसियों के बीच डिटेल शेयर होने में भी वक्त लगता है। पिछले कुछ सालों में नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या, जतिन मेहता जैसे बड़े कर्जदार बैंकों को चूना लगाकर विदेश भाग चुके हैं। जिनसे रिकवरी के लिए एजेंसियों कार्रवाई कर रही हैं।

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