सुप्रीम कोर्ट पहुंची ट्रेडमार्क की लड़ाई… स्व-संज्ञान लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्टर्ड की जनहित याचिका…

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 12-07-2019 / 5:55 PM
  • Update Date: 12-07-2019 / 5:55 PM

नई दिल्ली। बौद्विक संपदा अधिकार को लेकर एक महिला उद्यमी और भारत सरकार के अधीनस्थ ट्रेडमार्क कार्यालय के बीच लंबे अरसे से चल रही तकरार अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। यह मामला ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन को लेकर है, जो ढाई साल से अधिक समय से भी लंबित पड़ा हुआ है। अब सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या से ही इस मामले के सुलझाने के आसार हैं।

पीड़ित महिला उद्यमी मध्यप्रदेश के सिवनी जिले की निवासी है, जिसने अपने स्टार्टअप उद्योग के लिए वर्ष 2016 में कंपनी के नाम से ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन कराने आवेदन दिया था। इस बीच मीडिया में आई खबरों और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायतों को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट ने स्व-संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका रजिस्टर्ड किया है।

ढाई साल से लंबित है रजिस्ट्रेशन
संबंधित विभाग और पीड़ित महिला उद्यमी के बीच करीब ढाई साल से अपनी कंपनी के नाम के रजिस्ट्रेशन को लेकर पत्राचार और बातचीत भी हो रही है, लेकिन कोई सार्थक परिणाम नहीं मिल रहे हैं। ट्रेडमार्क कार्यालय के अधिकारी लगातार यह कह रहे हैं कि आपकी कंपनी के नाम के रजिस्ट्रेशन में करीब आठ साल का वक्त लगेगा, यह बात समझ से परे है, क्योंकि भारत सरकार की राष्ट्रीय बौद्विक संपदा अधिकार आईपीआर नीति 2016 के अनुसार रजिस्ट्रेशन के लिए महज एक महीने ही लगने चाहिए।

लिहाजा, पीड़ित महिला उद्यमी और भारत सरकार के ट्रेडमार्क कार्यालय के बीच इस मसले को लेकर खींचतान की स्थिति निर्मित हो गई है। मामला शिकवा-शिकायतों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर में मीडिया तक जा पहुंचा। इन्हीं को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट ने सिवनी जिले के इस मामले को स्वतः संज्ञान में लेकर जनहित याचिका दायर कर लिया।

कोर्ट से न्याय की आस
अपनी कंपनी के नाम के पंजीयन को लेकर ढाई साल से ट्रेडमार्क कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों से लड़ाई लड़ रहीं सिवनी की महिला उद्यमी दीपमाला को अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत करने वाली महिला उद्यमी का कहना है कि मैंने अपनी कंपनी को स्थापित करने और उसे नई पहचान देने के लिए बहुत मेहनत की है, अपनी पारिवारिक जमा-पूंजी तक मैंने अपने इस उद्योग में लगा दी है।

मैं हिम्मत नहीं हारूंगी, अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को संज्ञान में लिया है, इससे एक बार पुन: न्याय मिलने की उम्मीद है। ट्रेडमार्क कार्यालय देश की एक बड़ी बैटरी कंपनी के इशारे पर मुझे अपनी कंपनी के नाम के रजिस्ट्रेशन के लिए परेशान कर रही है और जान बूझकर देरी की जा रही है जो उचित नहीं है।

इस नाम से होना है रजिस्ट्रेशन
महिला उद्यमी ने वर्ष 2016 में अपनी कंपनी के नाम EXLDE के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया था। जिसे ट्रेडमार्क कार्यालय मुंबई द्वारा उक्त कंपनी के नाम को लेकर ईश्तहार निकाला गया। तब ये अब तक यह मामला महज फाइलों में ही दबकर रह गया है। इससे केंद्र सरकार के आधीन कार्यालय पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं।

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