सुप्रीम कोर्ट ने दिया सीएम योगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले पत्रकार को तुरंत रिहा करने का आदेश

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 11-06-2019 / 2:10 PM
  • Update Date: 11-06-2019 / 2:10 PM

नई दिल्ली। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर पत्रकार प्रशांत कनौजिया को शनिवार सुबह दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। जिस पर प्रशांत की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसपर सुनवाई करते हुए योगी सरकार को फटकार लगाया और प्रशांत को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

बता दें कि प्रशांत की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने कहा है कि हर हाल में नागरिक के अधिकारों का संरक्षण सरकार में बैठे लोगों को करना चाहिए। हालांकि साथ ही ये भी कहा कि किसी की राय अलग-अलग हो सकती है, प्रशांत को शायद उस ट्वीट को लिखना नहीं चाहिए था, लेकिन उन्हें किस आधार पर गिरफ्तार किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को एक ट्वीट के लिए 11 दिन तक जेल में नहीं रखे सकते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में योगी सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए प्रशांत के गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा धारा 505 के तहत एफआईआर को गैर जरुरी बताया। कोर्ट ने अपने आदेश के विस्तार में कहा कि पत्रकार को आखिर दिल्ली में क्यों नहीं मजिस्ट्रेट के सामने पैश किया गया।

इससे पहले सोशल मीडिया पर पत्रकार प्रशांत ने योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। प्रशांत ने 6 जून को अपने ट्विटर हैंडल पर ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ शीर्षक से एक पोस्ट की थी। साथ ही एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें एक युवती मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर खड़ी होकर खुद को योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। जिसके बाद हरकत में आई यूपी सरकार ने शनिवार को प्रशांत को दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी की निंदा की। राहुल ने कहा कि योगी आदित्यनाथ मूर्खतापूर्ण व्यवहार कर रहे हैं। अगर आरएसएस-बीजेपी समर्थित प्रोपोगैंडा और मेरे बारे में फेक न्यूज फैलाने वाले पत्रकारों को जेल में डाल दिया जाएगा तो ज्यादातर अखबारों और न्यूज चैनलों में स्टाफ की कमी हो जाएगी। पत्रकार को रिहा किया जाना जरूरी है।

बसपा प्रमुख मायावती ने कोर्ट के इस फैसले पर संतोष जाहिर करते हुए इसे योगी सरकार के लिए नसीहत के तौर पर लेने को कहा। मायावती ने पत्रकार को पूरा समर्थन अपना दिया था। एडीटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी इस मामले पर कोर्ट के आदेश पर खुशी व्यक्त की है। इसे प्रेस की आजादी के लिए अच्छा बताया।

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