जम्मू-कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला- इंटरनेट लोगों का मौलिक अधिकार, पाबंदियों की 7 दिन में समीक्षा करे सरकार

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 10-01-2020 / 4:01 PM
  • Update Date: 10-01-2020 / 4:01 PM

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान खत्म करने के बाद लगाए गए प्रतिबंधों की एक हफ्ते के अंदर समीक्षा करने को कहा है। कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से बैंकिंग, अस्पताल, शिक्षण संस्थानों समेत सभी जरूरी सेवाएं देने वाले संस्थानों में इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इंटरनेट को सरकार अनिश्चितकाल के लिए बंद नहीं कर सकती। कोर्ट ने इंटरनेट के इस्तेमाल को अभिव्यक्ति के अधिकार का हिस्सा माना है।

जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस बीआर गवई की तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि लोगों को असहमति जताने का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 144 का जिक्र करते हुए कहा कि इसका इस्तेमला सोच-विचार कर ही किया जाना चाहिए। विरोधी विचार को कुचलने के औजार के तौर पर इसका दुरुपयोग न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीर में जरूरी सेवाओं के इस्तेमाल के लिए इंटरनेट की बहाली का आदेश देते हुए बड़ी बात कही। कोर्ट ने कहा, इंटरनेट का इस्तेमाल संविधान के आर्टिकल 19 के तहत दिए गए अधिकार के तहत ही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें स्वतंत्रता और सुरक्षा में संतुलन बनाए रखना होगा। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है। इंटरनेट को जरूरत पड़ने पर ही बंद किया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत इंटरनेट के इस्तेमाल को मौलिक अधिकार का हिस्सा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से इंटरनेट के निलंबन के सभी आदेशों की समीक्षा करने के लिए कहा।

पीठ ने कहा कि इंटरनेट का उपयोग करना कुछ प्रतिबंधों के साथ संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत एक मौलिक अधिकार है और प्रेस की स्वतंत्रता एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र अधिकार है। कश्मीर में लगे प्रतिबंधों को लेकर न्यायालय ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति जताने वाले किसी विचार को दबाने के लिए धारा 144 सीआरपीसी (निषेधाज्ञा) का इस्तेमाल अनिश्चित काल तक नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि मैजिस्ट्रेट को निषेधाज्ञा जारी करते समय इस पर विचार करना चाहिए और आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करना चाहिए।

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