सवर्ण आरक्षण पर अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती: पासवान

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 11-01-2019 / 5:23 PM
  • Update Date: 11-01-2019 / 5:23 PM

नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दस प्रतिशत आरक्षण देने के लिए सरकार की तरफ से लाए गए लोकसभा और राज्यसभा में पास किए जाने और इस पर अधिकतर दलों के समर्थन के बाद संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस बीच केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने यह साफ कर दिया है कि सवर्ण आरक्षण को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है।

पासवान ने कहा कि सरकार ने इसके लिए संविधान में संशोधन कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक फैसले से राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस की नींद उड़ी हुई है। गौरतलब है कि यूथ फॉर इक्वेलिटी नामक ग्रुप और डॉ कौशल कांत मिश्रा द्वारा दाखिल की गई याचिका में कहा गया कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के द्वारा तय किए गए 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन करता है।

गैर सरकारी संगठन यूथ फॉर इक्वेलिटी और कौशल कांत मिश्रा ने याचिका में इस विधेयक को निरस्त करने का अनुरोध करते हुये कहा कि एकमात्र आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। याचिका में कहा गया कि इस विधेयक से संविधान के बुनियादी ढांचे का उल्लंघन होता है क्योंकि सिर्फ सामान्य वर्ग तक ही आर्थिक आधार पर आरक्षण सीमित नहीं किया जा सकता है और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा लांघी नहीं जा सकती।

बता दें कि सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका है। मंगलवार को लोकसभा में हुई लंबी बहस के बाद 323 सांसदों ने समर्थन किया था। वहीं, तीन सांसदों ने बिल का विरोध किया था। राज्यसभा में बुधवार को बिल पेश किया गया जिसके बाद पास हुआ। राज्यसभा में बिल के समर्थन में 165 मत पड़े और विरोध में सात वोट पड़े।

Share This Article On :
Loading...

BIG NEWS IN BRIEF