क्रिकेट में सफलता और असफलता एक सिक्के के दो पहलू: राहुल द्रविड़

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 22-12-2017 / 3:03 PM
  • Update Date: 22-12-2017 / 3:03 PM

नई दिल्ली। तेज गेंदबाज ब्रेट ली से एक बार पूछा गया कि उन्हेें किस बल्लेबाज को गेंद फेंकने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती थी। उन्होंने सचिन, लारा का नाम लेने की बजाय कहा था- राहुल द्रविड़। ली ने कहा था कि द्रविड़ की कंस्ट्रेशन तोडऩा उनके लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कई बार द्रविड़ को गेम दौरान उकसाया। कई इशारे किए। बाउंसर मारे। लेकिन द्रविड़ ने आगे से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

आखिर जब मैं थक जाता तो द्रविड़ मेरी खूब पिटाई करते थे। ब्रेट ली के इस बयान के बाद द्रविड़ की उस इमेज को फायदा मिला जिसमें दिग्गज क्रिकेटरों ने उन्हें द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया कहा था।
लेकिन क्या आपको पता है कि यह दीवार भी कभी कमजोर पड़ी है। यह हम नहीं बल्कि खुद राहुल द्रविड़ बता रहे हैं। बेंगलुरु में आयोजित गो स्पोट्र्स एथलीटस कार्यक्रम में द्रविड़ ने अपने जिंदगी के वह किस्से बताए जिनके बारे में क्रिकेट प्रेमी अभी तक अंजान है।

इसमें उन्होंने उस किस्से का भी जिक्र किया था जिसमें ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ के कारण उनकी कंस्ट्रेशन भंग हो गई थी लेकिन अपने मजबूत इरादों के साथ उन्होंने वापसी की थी। अपने-अपने क्षेत्र में कामयाबी टटोल रहे युवाओं के लिए द्रविड़ की यह बात मील का पत्थर हो सकती है। आखिर उन्हें पता होना चाहिए कि कामयाबी का रास्ता असफलताओं से होकर गुजरता है। द्रविड़ ने इस दौरान 2001 के मशहूर कोलकाता टेस्ट का एक किस्सा सुनाया।

इसे टेस्ट में भारत ने पहली पारी में पिछडऩे के बावजूद जबरदस्त कमबैक किया था। वीवीएस लक्ष्मण इस मैच में 281 रन बनाकर रातों रात स्टार बन गए थे। वहीं इसी मैच में द्रविड़ की 180 रनों की पारी को भी कोई भूल नहीं सकता। यह द्रविड़ ही थे जो लक्ष्मण के साथ टिके रहे और भारत को मजबूती की ओर ले गए। द्रविड़ ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के उस दौरे के दौरान मैं ज्यादातर असफल ही रहा था। पहले मुंबई टेस्ट बाद में कोलकाता टेस्ट की पहली पारी। रन न बना पाने के कारण टीम मैनेजमेंट ने मेरे बैटिंग क्रम में बदलाव कर दिया था।

उस मैच में मैं 6वें नंबर पर बैटिंग के लिए उतरा था। जब मैं मैदान में आया तो ऑस्ट्रेलिया कप्तान स्टीव वॉ मेरे पास आए। बोले- राहुल अब नंबर 6 पर आ गए, अगले मैच का क्या? क्या नंबर 12 पर दिखोगे। स्टीव ने मैच अनुसार मेरा मनोबल तोडऩे वाला काम किया था। इस कारण शुरुआती ओवरों में मुझे सामंजस्य बिठाने में दिक्कत होने लगी। आखिर मैंने अपनी पारी पर फोक्स किया।

मैंने सोचा अभी मेरे पास भविष्य के बारे में सोचना का मौका नहीं है। मैंने हर गेंद बेहतर तरीके से खेलने की कोशिश की। आखिर जब मैं आउट हुआ तो 180 रन बना चुका था। भारतीय टीम के लिए यह स्कोर काफी थे। अब दबाव में कंगारू टीम थी। हमने मैच जीता। फिर सीरिज भी जीतकर खुद को साबित किया। 44 वर्षीय राहुल द्रविड़ ने बताया, क्रिकेट में सफलता और असफलता एक सिक्के के दो पहलू हैं। अगर सफलता की बात करें तो मैंने असफलता का ही ज्यादातर स्वाद चखा है।

क्रिकेट के सभी फॉर्मेट्स में मैं कुल 604 बार बैटिंग के लिए मैदान में उतरा। इनमें से 410 बार ऐसा हुआ जब मैं 50 का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। तो ऐसे में मैं तो सफलता पर बात करने के लिए सबसे ज्यादा योग्य हूं। ऐसे में इंडिया के सबसे सफल बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर भी पीछे नहीं हैं। इंडिया के लिए 100 शतक जडऩे वाले सचिन भी 781 बार खेलने के लिए उतरे। इनमें 517 बार वह 50 के इस आंकड़े को पार नहीं कर पाए। ऐसे में वह भी सफल होने से ज्यादा असफल रहे हैं।

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