शेड हेयर कलर्स का बढ़ता ट्रेंड कर रहा बालों को कमजोर

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 13-03-2018 / 10:39 PM
  • Update Date: 13-03-2018 / 10:39 PM

फैशन में आए हेयर कलर का ट्रेंड बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। पहले रैनबो केवल आसमान में हुआ करता था, लेकिन आज का यूथ रैनबो को अपने बालों में भी फॉलो कर रहा है या यह कह सकते हैं कि बालों को रंग-बिरंगी डाय कर रहा है। इसमें लड़के हों या लड़कियां अपने बालों को रंगने के लिए बाजार में आए कई कलर्स का प्रयोग करते हैं।

यह हेयर कलर्स सिंगल डार्क, लाइट और मल्टी कलर्स भी हो सकते हैं, लेकिन इनका प्रयोग करने से पहले आप इनके खतरे के बारे जान लें, क्योंकि यह आपकी लाइफ स्टाइल से जुड़ा है। कहीं ये आपके शरीर को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञों से जानते हैं कि इन रंग-बिरंगे बालों से आपकी हेल्थ पर क्या असर पड़ता है।

स्किन एलर्जी
बालों में कलर करने से स्किन एलर्जी होती है, क्योंकि हेयर कलर में ऐसे केमिकल होते हैं जो स्किन पर गहरा असर करते हैं। वास्तव में हेयर कलर्स में पीपीडी पेराफेनील डिमाइन होता है, जिससे स्केल्प का लाल होना, खुजली, आंखों व कान के पास में सूजन आना, आंखों में जलन होना शामिल है। इससे चेहरे पर खुजली भी हो सकती है।

बालों का रूखापन व झड़ना
कलर्स में अमोनिया होने से यह तत्व हेयर फाइबर को खोलकर अपना काम करता है अर्थात बालों को कलर करता है, लेकिन उसे कमजोर व बेजान कर देता है। परमानेंट कलर में इसका अधिक प्रयोग किया जाता है। यह बालों में मौजूद प्रोटीन को समाप्त कर देता है, जिससे बालों में सभी प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यही केमिकल बालों की स्केल्प को कमजोर करता है और बालों को माइवरेट करने के लिए मॉइश्चराइजर नहीं मिलता है तो बालों में खुजली, डेंड्रफ होना शुरू हो जाता है।

कैंसर का खतरा
इन सभी के अतिरिक्त हेयर डाई में कारसीनोजिक नामक तत्व पाया जाता है जो कैंसर कासिंग होता है। विशेषज्ञ कहते हैं 1980 से पहले लोग हेयर डाई से कैंसर पीड़ित होते थे। नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट के अनुसार गाढ़े रंग के परमानेंट हेयर कलर डाई से ल्यूकेमिया या लिम्फोमा जैसे रोग भी हो सकते हैं। आज लोग सिंगल कलर, मल्टी कलर कराते हैं सभी कलर्स में अनेक केमिकल होने के कारण यह समस्या एक बार फिर बढ़ सकती है।

कलर्स की कई कैटेगिरी
डॉ. अनिल गर्ग कहते हैं कि टीवी एक्टर्स चंद समय के लिए कलर कराते हैं जो कि परमानेंट नहीं होता, जिससे बीमारी की संभावना कम हो जाती है। कलर्स की कैटेगिरी होती हैं, बाजार में नए-नए कलर आने से लोगों का हेयर कलर से विश्वास उठ गया है। चूंकि फैशन की बात होती है, तो वह कलर कराने के लिए मजबूर हो जाते हैं, लेकिन वे उस कलर का उचित परिणाम नहीं जानते कि यह बहुत हार्मफुल हैं।

कई बीमारियां होने का खतरा
डॉ. कविश चौहान ने बताया बाल बहुत नाजुक होते हैं, जिससे किसी भी मेडिसिन का प्रभाव उन पर पड़ता है। यदि हम कोई पावरफुल मेडिसिन लेते हैं तो हेयर फॉल की समस्या बढ़ जाती है। यहां तो बालों को कलर करने की बात है, उस कलर में कई तरह के केमिकल होते हैं, जो बालों को कई तरह से प्रभावित करते हैं। कुछ लोग ग्रे हेयर छुपाने के लिए, कुछ फैशन के कारण हेयर डाई करवा लेते हैं, जिससे वे कई बीमारियों को आमंत्रण देते हैं। यदि कोई प्रेग्नेंट लेडी हेयर कलर कराती है तो इसका सीधा असर उसके होने वाले बच्चे पर पड़ता है।

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