राहुल गांधी ने की उद्योगपति राजीव बजाज से बातचीत, कहा- भारत में ड्रैकियन लॉकडाउन

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 04-06-2020 / 12:06 PM
  • Update Date: 04-06-2020 / 12:06 PM

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोरोना पर चर्चा की सीरीज के तहत आज उद्योगपति राजीव बजाज से बात की। राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रवासी मजदूरों और गरीबों लिए लॉकडाउन बहुत ही भयावह रहा।

इस दौरान राजीव बजाज ने कहा कि दुनिया के कई देशों में मेरे रिश्तेदार और दोस्त हैं और वहां भी लॉकडाउन हुआ लेकिन ऐसा कहीं नहीं था। वह बाहर घूमने जा सकते थे। सामाजिक और भावनात्मक पहलुओं के संदर्भ में वे लोग बेहतर परिस्थिति में थे। राजीव बजाज ने कहा कि भारत में एक तरह का ड्रैकियन लॉकडाउन है।

राहुल गांधी-
कोविड के दौरान आपके यहां कैसी स्थिति है?

राजीव बजाज-
सभी के लिए ये नया माहौल है, हम इसमें ढलने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग इसे झेल सकते हैं, वो कोशिश कर रहे हैं लेकिन इस बीच कारोबार के साथ काफी कुछ हो रहा है।

राहुल गांधी-
किसी ने सोचा नहीं होगा कि दुनिया इस तरह लॉक हो जाएगी, विश्व युद्ध में भी ऐसा नहीं हुआ?

राजीव बजाज-
हमारे जापान, सिंगापुर में दोस्त हैं इसके अलावा दुनिया के कई देशों में बात होती है। भारत में एक तरह का ड्रैकियन लॉकडाउन है, ऐसा लॉकडाउन कहीं पर भी नहीं हुआ है। दुनिया के कई देशों में बाहर निकलने की अनुमति थी, लेकिन हमारे यहां स्थिति अलग रही।

राहुल गांधी-
भारत में कुछ लोग ऐसे हैं जो इससे निपट सकते हैं, लेकिन करोड़ों मजदूर हैं जिन्हें मुश्किल झेलनी पड़ी।

राजीव बजाज-
भारत ने ईस्ट नहीं बल्कि पश्चिम की ओर देखा, लेकिन पूर्वी देशों में इसके खिलाफ बेहतर काम हुआ है। पूर्वी देशों ने तापमान, मेडिकल समेत तमाम मुश्किलों के बावजूद बेहतर काम किया है। ऐसा कोई भी मेडिकल सुविधाएं नहीं हो सकतीं, जो इससे निपट सकें। ये अपने आप में पहली बार जैसा था।

मुझे लगता है कि अपने यहां फैक्ट और सच्चाई के मामले में कमी रह गई है, लोगों को लगता है कि ये बीमारी एक कैंसर जैसी है। अब जरूरत है कि लोगों की सोच को बदला जाए और जीवन को आम पटरी पर लाया जा सके। लेकिन इसमें एक लंबा वक्त लग सकता है।

राहुल-
मैंने कई एक्सपर्ट से बात की है, लॉकडाउन की शुरुआत में मेरी बात हुई थी कि जैसे ही लॉकडाउन लागू होता है तो बीमारी का तरीका बदल जाता है। उसे बदल पाना मुश्किल है, इसमें वक्त और कोशिशें ज्यादा है।

राजीव बजाज-
टीबी, डायरिया जैसी बीमारी की बजाय ऐसा कुछ पहली बार हुआ है, इस बीमारी ने विकसित देशों पर चोट पहुंचाई है। क्योंकि जब अमीर बीमार होते हैं, तो हेडलाइन बनती है। अफ्रीका में हर दिन 8000 बच्चे भूख से मरते हैं, लेकिन हेडलाइन नहीं बनती है। क्योंकि इस बीमारी से विकसित देश, अमीर लोग और समृद्ध लोग प्रभावित हैं इसलिए कोरोना पर शोर ज्यादा है।

आम आदमी के नजरिए से लॉकडाउन काफी कठिन है, क्योंकि भारत जैसा लॉकडाउन कहीं पर भी नहीं हुआ। आज हर कोई बीच का रास्ता निकालना चाहता है, भारत ने सिर्फ पश्चिम को नहीं देखा, बल्कि उससे आगे निकल गया। और कठिन लॉकडाउन लागू किया।

कमजोर लॉकडाउन से वायरस रहता है और सख्त लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था बिगड़ गई। हम इसके बीच में फंस गए हैं और हमें जापान और स्वीडन की तरह नीति अपनानी चाहिए थी। वहां पर नियमों का पालन हो रहा है, लेकिन लोगों के लिए जीवन को मुश्किल नहीं बनाया जा रहा है।

राहुल गांधी-
हमारे यहां मजदूर हैं, प्रवासी मजदूर हैं लेकिन हम पश्चिम को देखते रहे। हम अपनी मुश्किल ही क्यों नहीं देखते हैं, दूसरे देश को क्यों देखते हैं।

राजीव बजाज-
अगर आप मार्च में वापस जाएं, तो आप तीन महीने पहले क्या सोचते?

राहुल-
हमारी चर्चा ये हुई थी कि राज्यों को ताकत देनी चाहिए और केंद्र सरकार को पूरा समर्थन देना चाहिए। केंद्र को रेल-फ्लाइट पर काम करना चाहिए था, लेकिन सीएम और डीएम को जमीन पर लड़ाई लड़नी चाहिए थी। मेरे हिसाब से लॉकडाउन फेल है और अब केस बढ़ रहे हैं।

अब केंद्र सरकार पीछे हट रही है और कह रही है राज्य संभाल लें। भारत ने दो महीने का पॉज बटन दबाया और अब वो कदम उठा रहा है जो पहले दिन लेना था। हमारी ओर से लोगों को मदद नहीं की गई, लोगों में भरोसा जगाना जरूरी है। जबतक ऊपर से नीचे तक फैसला होगा तो ऐसा ही होगा, लेकिन नीचे से ऊपर फैसला होना चाहिए।

राजीव बजाज-
जब कोई हेल्मेट नहीं पहनता तो कुछ नहीं होता है, लेकिन अब अगर कोई मास्क नहीं पहन रहा है तो उसे सड़क पर बेइज्जत किया जा रहा है। लेकिन ये गलत है, आज दुनिया में सरकारें आम लोगों को सीधे मदद दे रही हैं। भारत में सरकार की ओर से आम लोगों को सीधे हाथ में पैसा नहीं दिया गया है।

राहुल गांधी-
मुझे समझ नहीं आ रहा है कि सरकार लोगों के हाथ में पैसा क्यों नहीं दे रही है, राजनीति को भूलिए लेकिन इस वक्त लोगों को पैसा देने की जरूरत है। सरकार के व्यक्ति ने मुझसे कहा कि इस वक्त चीन के मुकाबले भारत के सामने काफी मौका है, अगर हम मजदूरों को पैसा देंगे तो बिगड़ जाएंगे और काम पर नहीं आएंगे। हम बाद में इन्हें पैसा दे सकते हैं, इस तरह की बातें मुझे कही गईं।

राजीव बजाज-
भारत मुश्किल से बच नहीं सकता है, खुद को निकालना पड़ेगा। मजदूरों को अगर 6 महीने तक ही पैसा दिया जाए तो मार्केट में डिमांड बढ़ेगी।

राहुल-
हम अपनी अर्थव्यवस्था को कैसे बढ़ाएं, मैन्युफैक्चरिंग पर कैसे जोर दिया जाए।

राजीव बजाज-
भारत की मैन्युफैक्चरिंग पर दुनिया की नजर है, ब्राजील बजाज की नीति की तारीफ करता है और इसे बदलाव वाला कहता है। अगर आप धोनी बनना चाहते हैं तो आप हर स्पॉट पर नहीं खेल सकते हैं। कंपनियों को भी स्पेशलिस्ट बनना होगा। हम लोग विचारों से काफी खुले हैं। भारत को अपने विचारों का खुलापन नहीं खोना चाहिए।

राहुल गांधी-
पिछले कुछ सालों में जो कहना है कह दो वाला सीन कम हो गया है। आज लोग कहते हैं कि बजाज में दम है।

राजीव बजाज-
मैं जरूर कुछ ऐसी बातें कही हैं जिसपर विवाद हुआ है। कुछ लोगों ने मुझे बात करने से पहले चेताया था, लेकिन मैंने इसमें कुछ बुरा नहीं समझा। आज देश में 100 लोग बोलने से डरते हैं, 90 के पास छुपाने को है और आज कई कंकाल अलमारी से बाहर आए हैं। कई लोग नहीं बोलना चाहते हैं लेकिन मेरे पिता बोलते हैं वो निडर होकर कहते हैं।

अभी अनलॉकिंग की ओर कुछ ठोस काम नहीं हुआ है, लोगों में अभी विश्वास की कमी है। हर कोई अलग बात बोल रहा है, जो गलत है। लोगों में डर है कि कोरोना से मौत हो रही है, लेकिन ऐसा सच नहीं है। लोगों के दिमाग से डर निकालना होगा, पीएम मोदी को आज देश को कहना चाहिए कि इस वायरस से डरने की जरूरत नहीं है।

Share This Article On :
Loading...

BIG NEWS IN BRIEF