भारत-चीन तनाव: राहुल गांधी ने फिर मोदी सरकार से पूछे सवाल

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 07-07-2020 / 5:10 PM
  • Update Date: 07-07-2020 / 5:11 PM

नई दिल्ली। भारत सरकार की सख्ती से घबराया चीन अब सीमा पर तनाव कम करने पर सहमत हो गए हैं। पूर्वी लद्दाख स्थित गलवान घाटी में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास से भारतीय और चीनी सैनिक दो किलोमीटर पीछे हट गए हैं। बता दें कि यहां पिछले महीने भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जबकि अज्ञात संख्या में चीनी सैनिक भी मारे गए थे।

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर से पीएम मोदी पर गलवान घाटी को लेकर हमला बोला है। राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से मोदी सरकार से सवाल करते हुए तीन बातें पूछी हैं। राहुल ने अपने ट्वीट में NSA अजीत डोवाल और चीनी स्टेट काउंसिलर वांग यी की बातचीत को लेकर दोनों पक्षों की ओर से जारी किए गए बयान को शेयर किया। उन्होंने लिखा ‘राष्ट्रहित सर्वोपरि है। भारत सरकार का कर्तव्य है कि वो इसकी रक्षा करे।

फिर,

  1. यथास्थिति को लेकर दबाव क्यों नहीं डाला गया है?
  2. चीन हमारे भूभाग में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को सही कैसे ठहरा पा रहा है?
  3. गलवान घाटी में हमारी क्षेत्रीय संप्रुभता का जिक्र क्यों नहीं है

कांग्रेस नेता ने सवाल किया, पूर्व की यथास्थिति बहाल करने पर जोर क्यों नहीं दिया गया? हमारे क्षेत्र में 20 निहत्थे जवानों की हत्या को चीन को सही ठहराने क्यों दिया गया? गलवान घाटी पर हमारी भूभागीय संप्रभुता का उल्लेख क्यों नहीं किया गया?

गौरतलब है कि तनाव कम होने के पहले संकेत के रूप में चीनी सेना ने सोमवार को पूर्वी लद्दाख में कुछ इलाकों से अपनी सीमित वापसी शुरू कर दी। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर बात की जिसमें वे एलएसी से सैनिकों के ‘तेजी से’ पीछे हटने की प्रक्रिया को पूरा करने पर सहमत हुए।

विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि डोभाल और वांग के बीच रविवार को हुई वार्ता में इस बात पर सहमति बनी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता की पूर्ण बहाली के लिए ‘जल्द से जल्द’ सैनिकों का ‘पूरी तरह पीछे हटना’ आवश्यक है तथा दोनों पक्षों को मतभेदों को विवाद में तब्दील नहीं होने देना चाहिए। डोभाल और वांग दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता से संबंधित विशेष प्रतिनिधि हैं।

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