फालुन दाफा साधना स्कूलों में लोकप्रिय, छात्र और शिक्षक सकारात्मक प्रभावों से प्रसन्न

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 20-11-2019 / 1:41 PM
  • Update Date: 20-11-2019 / 1:41 PM

साफ़ मन और शुद्ध शरीर से सब हासिल किया जा सकता है। शायद यही कारन है की फालुन दाफा का प्राचीन साधना अभ्यास और ध्यान पद्धति भारत के विभिन्न स्कूलों में लोकप्रिय हो रही है। जबकि छात्र इन व्यायामों को सुगमता से करते हैं, वही शिक्षक छात्रों के व्यवहार और शैक्षणिक परिणामों में सुधार से प्रसन्न हैं। स्कूल इस बात की भी सराहना करते हैं कि यह पद्धति किसी धर्म से संबंधित नहीं है और पूरी तरह नि:शुल्क सिखाई जाती है, और यह व्यायाम शरीर को शुद्ध करने, तनाव से राहत देने और आंतरिक शांति प्रदान करने में मदद करते हैं।

फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) में पांच सौम्य व्यायाम हैं जिसमें ध्यान भी शामिल है। इस साधना अभ्यास को पहली बार चीन में मई 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा सार्वजनिक किया गया। आज, 114 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोग इसका अभ्यास कर रहे हैं।

बैंगलोर

बैंगलोर और उसके आसपास के 80 से अधिक स्कूलों ने फालुन दाफा अभ्यास से हुए लाभ को सराहा है। फालुन दाफा का बैंगलोर के साथ जुड़ाव वर्ष 2000 में हुआ, जब बापू कम्पोजिट कॉलेज की समाजशास्त्र की व्याख्याता ललिता बाई ने सिंगापुर की व्यक्तिगत यात्रा के दौरान इस अभ्यास को सीखा।

“चूंकि मुझे इससे बहुत फायदा हुआ, इसलिए मैंने सोचा कि फालुन दाफा का अभ्यास करना छात्रों के लिए भी फायदेमंद होगा,” ललिता बाई कहतीं हैं। “मैं व्यायाम करने के बाद वास्तव में ऊर्जावान महसूस करती हूँ। ध्यान करते समय, मुझे लगता है कि कुछ सेकंड के लिए मेरी हथेली के चारों ओर बड़ी शक्ति के साथ दिव्य ऊर्जा घूम रही है।”

नेशनल स्कूल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2007 में बैंगलोर में अपना 50 वां वर्षगांठ समारोह मनाया, जिसमें भारत भर के ख्याति-प्राप्त निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों ने भाग लिया। इस अवसर पर, प्रतिभागियों को फालुन दाफा अभ्यास का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद, 60 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने अभ्यास सीखने में रुचि व्यक्त की।

बैंगलोर के पास चिंतामणि टाउन में, ज्योति स्कूल के प्रिंसिपल, श्री वर्की ने स्वयं फालुन दाफा के चमत्कारी स्वास्थ प्रभावों का अनुभव करने पर शिक्षकों और छात्रों को अभ्यास सिखाया। श्री वर्की ने बताया कि फालुन दाफा सीखने से पहले उनका स्वास्थ्य खराब रहता था, लेकिन साधना अभ्यास के बाद, उन्होंने व्यापक शारीरिक और आध्यात्मिक परिवर्तनों का अनुभव किया। इसलिए उन्होंने शिक्षकों और छात्रों को भी अभ्यास के लिए प्रेरित किया।

श्री वर्की ने बताया कि फालुन दाफा का अभ्यास करने से पहले, स्कूल में छात्रों के शैक्षणिक परिणाम औसत रहते थे, और कई छात्र अवज्ञाकारी थे और खराब व्यवहार का प्रदर्शन करते थे। फालुन गोंग के अभ्यास के बाद, बुरे व्यवहार वाले छात्रों के व्यवहार में बदलाव आया, और स्कूल के शैक्षणिक परिणामों में सुधार हुआ। सकारात्मक प्रभाव आसानी से देखा जा सकता था।

बैंगलोर शहर के बाहरी इलाके में,बायरेश्वर स्कूल के हेडमास्टर, कई छात्रों के उदाहरणों का वर्णन करते हैं, जो फालुन दाफा के अभ्यास के बाद बदल गए थे। उन्होंने एक लड़के के बारे में बताया जो एक राजमिस्त्री का बेटा था जिसने स्कूल बनाने में मदद की थी। बच्चे के पढाई में कमजोर होने और खराब व्यव्हार के कारण, पास के गाँव के सभी स्कूलों ने उसे निकाल दिया था।

राजमिस्त्री ने हेडमास्टर से संपर्क किया और उसे अपने स्कूल में दाखिला दिलाने का अनुरोध किया। अन्य छात्रों के साथकुछ हफ्तों के लिए फालुन दाफा का अभ्यास करने के बाद, लड़का शांत हो गया और पढ़ाई में मन लगाने लगा। वह अपनी अंतिम स्कूल परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ और आज शहर के एक कॉलेज में पढ़ रहा है।

नागपुर
फालुन दाफा नागपुर और उसके आसपास के कई स्कूलों में लोकप्रियता हासिल कर रहा है। जीजामाता हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज के प्रिंसिपल ने एक ही समय में हाई स्कूल और कॉलेज स्तर की कक्षाओं में छात्रों को अभ्यास सिखाने के लिए व्यवस्था की। प्रिंसिपल और शिक्षकों ने फालुन गोंग के सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों की प्रशंसा की, और कई प्रश्न पूछे। स्कूल के अकादमिक स्टाफ के कई सदस्यों ने अभ्यास के बारे में और अधिक सीखने की इच्छा जताई।

लेह, लद्दाख
फालुन दाफा का परिचय लेह, लद्दाख और उसके आसपास के कई स्कूलों में किया गया है। इसमें कई बड़े और छोटे स्कूल शामिल हैं, जिनमें सबसे छोटे में केवल 17 बच्चे थे, और सबसे बड़े में हजारों। इन सभी स्कूलों में, बच्चों और शिक्षकों को फालुन दाफा के पांच व्यायाम सिखाये गए। बच्चों ने अभ्यास सीखने में बहुत रुचि दिखाई। अनेक छात्रों ने अपने शिक्षकों सेस्कूल में आगे भी अभ्यास जारी रखने का अनुरोध किया।

वाराणसी
मई 2012 में, फालुन दाफा को वाराणसी शहर के एक प्रसिद्ध स्कूल मेंवार्षिक ग्रीष्मकालीन अवकाश शिविर के दौरान सिखाया गया। प्राथमिक अनुभाग के छात्रों को कई दिनों तक अभ्यास सिखाया गया। आखिरी दिन, जब बच्चों से पूछा गया कि उन्होंने फालुन दाफा के बारे में क्या सीखा।

उन्होंने सरल किन्तु विचारपूर्ण टिप्पणियाँ की, जैसे: “फालुन दाफा हमें ईमानदार होना सिखाता है,” “जब मैं अभ्यास करता हूं तो मैं बहुत ऊर्जावान महसूस करता हूं,” मैं ध्यान में बहुत शांति महसूस करता हूँ,” और “फालुन दाफा हमें अच्छा बनना, दूसरों के बारे में सोचना, सच्चा होना, झूठ न बोलना और सहनशील होना सिखाता है।”

यकीनन छात्रों और शिक्षकों ने अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने, अपने मन को शांत करने और अच्छे शैक्षणिक परिणाम प्राप्त करने में फालुन दाफा अभ्यास को मददगार पाया।

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