विश्वभारती के दीक्षांत समारोह में बोले पीएम मोदी- देश बेटियों के आत्मविश्वास के बिना ‘आत्मनिर्भर’ नहीं बन सकता

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 19-02-2021 / 3:21 PM
  • Update Date: 19-02-2021 / 3:21 PM

नई दिल्ली। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की विश्वभारती यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, अगर विश्व भारती को सिर्फ एक यूनिवर्सिटी के रूप में देखना चाहते, तो वो इसे ग्लोबल यूनिवर्सिटी या कोई और नाम दे सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे विश्व भारती विश्वविद्यालय नाम दिया। गुरुदेव टैगोर के लिए विश्व भारती सिर्फ ज्ञान देने वाली एक संस्था मात्र नहीं थी। ये एक प्रयास है भारतीय संस्कृति के शीर्षस्थ लक्ष्य तक पहुंचने का। इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी शामिल रहे।

विश्वभारती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अगर आप देश को सबसे आगे रखते हैं तो आपको समस्याओं में ही समाधान मिलेगा। अगर आपके इरादे नेक हैं और ‘मां भारती’ के प्रति श्रद्धा है तो आपका हर निर्णय आपको समाधान की तरफ ले जाएगा। भारत अपनी बेटियों के आत्मविश्वास के बिना ‘आत्मनिर्भर’ नहीं बन सकता।

पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर ने जो अद्भुत धरोहर मां भारती को सौंपी हैं, उसका हिस्सा बनना, आप सभी साथियों से जुड़ना, मेरे लिए प्रेरक भी है और आनंददायक भी है। इस बार तो कुछ समय के अंतराल पर मुझे दूसरी बार ये मौका मिला है। आपके जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सभी युवा साथियों को, माता पिता को और गुरुजनों को मैं बहुत बहुत बधाई और अनेक अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल ने अतीत में भारत के समृद्ध ज्ञान-विज्ञान को आगे बढ़ाने में देश को नेतृत्व दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल, एक भारत, श्रेष्ठ भारत की प्रेरणा स्थली भी रहा है और कर्मस्थली भी रहा है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि भारत जो है, जो मानवता, जो आत्मीयता, जो विश्व कल्याण की भावना हमारे रक्त के कण-कण में है। उसका एहसास बाकी देशों को कराने के लिए विश्व भारती को देश की शिक्षा संस्थाओं का नेतृत्व करना चाहिए।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत पर ब्रिटिश एजुकेशन सिस्टम थोपे जाने से पहले, थॉमस मुनरो ने भारतीय शिक्षा पद्धति और भारतीय शिक्षा व्यवस्था की ताकत देखी थी। उन्होंने देखा था कि हमारी शिक्षा व्यवस्था कितनी वाइब्रेंट है।

पीएम मोदी ने कहा कि हम इस वर्ष अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। विश्व भारती के प्रत्येक विद्यार्थी की तरफ से देश को सबसे बड़ा उपहार होगा कि भारत की छवि को और निखारने के लिए आप ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि मेरा आग्रह है, अगले 25 वर्षों के लिए विश्व भारती के विद्यार्थी मिलकर एक विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। वर्ष 2047 में, जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष का समारोह बनाएगा, तब तक विश्व भारती के 25 सबसे बड़े लक्ष्य क्या होंगे, ये इस विजन डॉक्यूमेंट में रखे जा सकते हैं।

साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि जो दुनिया में आतंक फैला रहे हैं, जो दुनिया में हिंसा फैला रहे हैं, उनमें भी कई अत्यधिक पढ़े लिखे और कुशल लोग शामिल हैं। दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं जो कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से दुनिया को मुक्ति दिलाने के लिए दिनरात प्रयोगशालाओं में जुटे हुए हैं।

अगर आपकी नीयत साफ है और निष्ठा मां भारती के प्रति है, तो आपका हर निर्णय किसी ना किसी समाधान की तरफ ही बढ़ेगा। सफलता और असफलता हमारा वर्तमान और भविष्य तय नहीं करती। हो सकता है आपको किसी फैसले के बाद जैसा सोचा था वैसा परिणाम न मिले, लेकिन आपको फैसला लेने में डरना नहीं चाहिए।

बता दें कि शांतिनिकेतन में स्थित विश्वभारती की स्थापना रवींद्रनाथ टैगोर ने 1921 में की थी। यह देश में सबसे पुराना केंद्रीय विश्वविद्यालय है। संसद के कानून के द्वारा मई 1951 में विश्वभारती को केंद्रीय विश्वविद्यालय और ‘राष्ट्रीय महत्व का संस्थान’ घोषित किया गया।

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