पीएम मोदी ने किया डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 13-10-2020 / 5:17 PM
  • Update Date: 13-10-2020 / 5:17 PM

नई दिल्ली। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन किया। इस मौके पर उन्होंने प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी का नाम बदलकर ‘लोकनेते डॉ. बालासाहेब विखे पाटिल प्रवर रूरल एजुकेशन सोसाइटी’ रखा। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि, डॉक्टर बालासाहेब विखे पाटिल की आत्मकथा का विमोचन आज भले हुआ हो लेकिन उनके जीवन की कथाएं आपको महाराष्ट्र के हर क्षेत्र में मिलेंगी।

पीएम मोदी ने कहा कि, गाँव गरीब के विकास के लिए, शिक्षा के लिए, उनका योगदान हो, महाराष्ट्र में कॉपरेटिव की सफलता का उनका प्रयास हो, ये आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देगा, इसलिए बालासाहेब वीखे पाटिल के जीवन पर ये किताब हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि, उन्होंने सत्ता और राजनीति के जरिए हमेशा समाज की भलाई का प्रयास किया।उन्होंने हमेशा इसी बात पर बल दिया कि राजनीति को समाज के सार्थक बदलाव का माध्यम कैसे बनाया जाए, गांव और गरीब की समस्याओं का समाधान कैसे हो।

बालासाहेब विखे पाटिल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि, व्यक्ति कितना ही पढ़ा-लिखा क्यों न हो, अगर उसमें खेती का कौशल नहीं हो तो वो कभी खेती नहीं कर पाएगा, जब ऐसी बात है तो हमें खेती को एंटरप्राइज क्यों नहीं कहते? बालासाहेब विखे पाटिल जी के मन में ये प्रश्न ऐसे ही नहीं आया। ज़मीन पर उन्होंने जो अनुभव किया, उसके आधार पर ये बात कही।

पीएम ने कहा कि, बालासाहेब विखे पाटिल के इस सवाल का उत्तर आज के ऐतिहासिक कृषि सुधारों में है। आज खेती को, किसान को अन्नदाता की भूमिका से आगे बढ़ाते हुए, उसको उद्यमी बनाने,एंटरप्रेन्योरशिप की तरफ ले जाने के लिए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

महाराष्ट्र में सिंचाई योजना को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत महाराष्ट्र में बरसों से लटकी 26 परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तेजी से काम किया गया। इनमें से 9 योजनाएं अब तक पूरी हो चुकी हैं। इनके पूरा होने से करीब-करीब 5 लाख हेक्टेयर ज़मीन को सिंचाई की सुविधा मिली है।

उन्होंने कहा कि, गांवों की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में माइक्रो फाइनेंस का विशेष रोल है। मुद्रा जैसी योजना से गांव में स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं। यही नहीं बीते सालों में देश में सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी करीब 7 करोड़ बहनों को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का ऋण दिया गया है।

Share This Article On :

BIG NEWS IN BRIEF