कानूनी मदद पर मात्र 0.75 रुपए होते हैं खर्च : रिपोर्ट

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 12-09-2018 / 11:03 PM
  • Update Date: 12-09-2018 / 11:03 PM

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने कहा कि कानूनी मदद मुहैया कराने वाले वकील मानवाधिकार के रक्षक हैं और जरूरत है कि उन्हें भी लोक अभियोजकों के स्तर का भुगतान किया जाए। राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (सीएचआरआई) की रिपोर्ट ‘सलाखों के पीछे उम्मीद’ से पता चला है कि भारत में कानूनी मदद पर प्रति व्यक्ति खर्च महज 0.75 रुपए है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकारों को आवंटित धनराशि में 14 फीसदी राशि खर्च ही नहीं की जाती। बिहार, सिक्किम और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने आवंटित धनराशि में 50 फीसदी में से भी कम खर्च किया जबकि 520 जिला विधिक सेवा प्राधिकारों (डीएलएसए) में से महज 339 में पूर्णकालिक सचिव हैं ताकि कानूनी मदद सेवाओं की आपूर्ति का प्रबंधन किया जा सके।

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