आईआईएम इंदौर में ऑनलाइन रूरल इंगेजमेंट प्रोग्राम की हुई शुरुआत

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 18-02-2021 / 4:51 PM
  • Update Date: 18-02-2021 / 4:51 PM

आईआईएम इंदौर के 650 प्रतिभागी मध्य प्रदेश के 52 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों से 13,000 उत्तरदाताओं का करेंगे टेलीफोनिक सर्वेक्षण

जवाब देने वालों में सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राएं, उनके माता-पिता और शिक्षक रहेंगे शामिल

प्रत्येक आईआईएम इंदौर का प्रतिभागी अगले दो दिनों में 20 उत्तरदाताओं का साक्षात्कार करेगा

आईआईएम इंदौर के रूरल इंगेजमेंट प्रोग्राम (आरईपी) 2021 का ऑनलाइन मोड में शुभारम्भ 18 फरवरी 2021 को हुआ । 2009 में शुरू हुआ आरईपी एक अनूठी पहल है जिसेमें संस्थान के नवोदित प्रबंधकों और उद्यमियों को जागरूक करने के उद्देश्य से आरम्भ किया गया था, जिसमें गाँवों में रह कर प्रतिभागी सरकार द्वारा चलाई गईं विभिन्न योजनाओं का की प्रभावशीलता का अध्ययन करते हैं और उनका विश्लेषण और निष्पादन के लिए सुझाव देते हैं । इस बार, महामारी के चलते यह कार्यक्रम ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया है, जिसमें प्रतिभागी मध्य प्रदेश के 52 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 40,000 प्रतिभागियों का टेलीफोनिक सर्वेक्षण करेंगे ।

इस वर्ष की आरईपी का विषय है ‘School Education in Rural Madhya Pradesh: Overcoming the Challenges of Covid19 and Beyond’, यानि ‘मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा और वर्तमान महामारी के समय में उससे सम्बंधित चुनौतियाँ’। भारत में 1.33 लाख स्कूल हैं; जिसमें से 69 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में और 31 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं । 94 प्रतिशत सरकारी स्कूल मध्य प्रदेश में ग्रामीण इलाकों में हैं, जबकि सिर्फ 6 प्रतिशत शहरी इलाकों में हैं । प्राथमिक और माध्यमिक दोनों स्तरों में कुल 98 लाख छात्र-छात्राएं नामांकित हैं; हालाँकि, सिर्फ 30 प्रतिशत के पास ही स्मार्टफोन है । छात्रों की अधिकांश (65%) रेडियो और टेलीविजन (60%) तक पहुंच है । आईआईएम इंदौर आरईपी के प्रतिभागी ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली छात्रों को बाधा रहित शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा की गई पहलों का विश्लेषण करेंगे ।

ऑनलाइन शुभारम्भ आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रोफेसर हिमाँशु राय और मध्य प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव आईएएस सुश्री रश्मि अरुण शमी की आभासी उपस्थिति में हुआ । प्रोफेसर अजीत फडनीस, आरईपी समन्वयक और संकाय, आईआईएम इंदौर; श्री शितांशु शुक्ला, संयुक्त निदेशक, (स्कूल शिक्षा), मध्य प्रदेश सरकार और श्री एफ.ए.जामी, यूनिसेफ, भोपाल भी इस अवसर पर उपस्थित रहे ।

आईआईएम इंदौर में विविधता की बात करते हुए प्रोफेसर राय ने कहा कि आईआईएम इंदौर का मिशन प्रतिभागियों को जिम्मेदार प्रबंधक और लीडर बनाना है – जो समावेशी निर्णय ले सकें – और इसे प्राप्त करने के लिए विविधता महत्वपूर्ण है । ‘ भारत में 833 मिलियन लोग 6.7 लाख गांवों में रहते हैं—अतः उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं को संबोधित करने, उनकी समस्याओं को हल करने का, उन्हें समझने का, और हम उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए क्या कर सकते हैं, इसका तरीका खोजना महत्वपूर्ण है । ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं शहर से अलग होती हैं, और आरईपी प्रतिभागियों को संवेदनशील होने और जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझने का अवसर प्रदान करता है’, उन्होंने कहा ।

सुश्री शमी ने उल्लेख किया कि आरईपी प्रतिभागियों ऐसा अनुभव प्रदान करता है जो उन्हें त्वरित और सही निर्णय लेने, जमीन से जुड़ने और संवेदनशील होने में सक्षम बनाता है । उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महामारी के दौरान की गई पहल को साझा करते हुए जानकारी दी की कैसे सरकार ने सुनिश्चित किया कि दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र पढने और सीखने में किसी भी बाधा का सामना न करें । ‘हमने सभी शिक्षार्थियों को ट्रैक और मैप किया और एक टैग #AbPadhaiNahiRukegi के साथ विभिन्न डिजिटल और गैर-डिजिटल पहल शुरू की । इसमें स्टेट वाइड रेडियो प्रोग्राम, डिजिटल लर्निंग एनहांसमेंट प्रोग्राम, DIKSHA के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण, स्वयंप्रभा टीवी प्रसारण, व्हाट्सएप आधारित मूल्यांकन और हमरा घर, हमरा विद्यालय ’शामिल हैं’, उन्होंने बताया ।

प्रतिभागियों को श्री जामी के साथ बातचीत करने का अवसर मिला, जिन्होंने ‘भारत में स्कूल शिक्षा: चुनौतियां और अवसर’ पर अपने विचार रखे । श्री शितांशु शुक्ला ने ‘मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा के लिए नई पहल’ पर अपने विचार साझा किए ।

प्रोफेसर फडनीस, प्रोफेसर अजय शर्मा और प्रोफेसर सुरभि दयाल ने छात्रों को सर्वेक्षण उपकरणों और फोन साक्षात्कार के बारे में जानकारी दी । इस वर्ष कार्यक्रम के उद्देश्य को साझा करते हुए, प्रोफेसर फडनीस ने कहा कि आईआईएम इंदौर के प्रतिभागी महामारी के दौरान स्कूलों को बंद करने के बाद शिक्षा प्रदान करने में लगाए गए प्रयासों को खोजने पर ध्यान केंद्रित करेंगे । ‘प्रश्नावली में महामारी के दौरान स्कूली शिक्षा में उपयोग की जाने वाली तकनीकों के बारे भी जानकारी शामिल है, जिससे पता चल सकेगा की उसके क्या फायदे रहे हैं ’, उन्होंने कहा ।

छह प्रतिभागियों की दो टीमें एक जिले का अध्ययन करेंगी और प्रत्येक जिले से अधिकारियों / शिक्षकों / छात्रों और अभिभावकों के लगभग 600-700 संपर्कों का एक डेटाबेस प्राप्त करेंगी । IPM, PGP और PGPHRM कार्यक्रम के सभी प्रतिभागी इस सर्वेक्षण में योगदान देंगे । प्रतिभागी इस महीने के अंत तक एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जिसमें उत्तरदाताओं के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान होगा ।

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