नीदरलैंड ने बुर्का पहनने पर लगाई रोक

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 03-08-2019 / 2:06 PM
  • Update Date: 03-08-2019 / 2:06 PM

नई दिल्ली। नीदरलैंड में बुर्का पहनने पर रोक लगा दी गई है। इस देश ने अपने यहां 1 अगस्त 2019 से बुर्का को प्रतिबं‍ध कर दिया है। नए कानून के मुताबिक अब सार्वजनिक स्थलों पर ऐसा कुछ भी नही पहना जा सकेगा जो चेहरे को ढकता हो। इसके साथ ही स्कूल, अस्पताल, सार्वजनिक भवन और बस, रेल जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी बुर्के पर रोक लगा दी गई है। नीदरलैंड में यह सब सुरक्षा के मद्देनजर किया गया है।

यूरोप में तेजी से बढ़ते इस्लामिक आतंकवाद के जवाब में इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। नीदरलैंड में सार्वजनिक स्‍थलों पर हेल्‍मेट पहनकर जाने पर भी रोक लगा दी गई है। यहां तक कि सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढंकने पर रोक और उल्लंघन पर 150 यूरो जुर्माने के भी प्रावधान भी लागू कर दिए गए हैं। ये शुरूआत सबसे पहले फ्रांस से हुई।

फ्रांस बुर्का बैन करने वाला पहला देश
फ्रांस यूरोप में बुर्का बैन करने वाला पहला देश है। वहां 10 साल ये यह प्रतिबंध लागू है। डेनमार्क में भी पिछले एक साल से बुर्के पर प्रतिबंध है। इसी साल यानि 2019 में ऑस्ट्रिया ने भी अपने प्राइमरी स्कूलों में छात्राओं को बुर्का पहनना बैन कर दिया। जर्मनी में भी यही अभियान चल रहा है। यहां के हेसे प्रांत में भी सिविल सेवा के कर्मचारियों के बुर्का पहनने पर पाबंदी लगा दी गई है।

जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी ने भी छात्राओं के बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी तरह बुल्गारिया में भी साल 2016 में चेहरा ढकने पर है। यहां सजा के भी प्रावधान हैं व 750 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इटली में 70 के दशक से ही ऐसा कानून लागू है जो हर ऐसी पोशाक पहनने को बैन करता है जो शिनाख्त में बाधा डाले।

सऊदी अरब में महिलाओं को अकेले विदेश जाने की अनुमति
सऊदी अरब की बात करें तो यहां पर महिलाओं को अकेले विदेश जाने की अनुमति का मिलना यहां पर हो रहे बदलाव की प्रक्रिया का एक हिस्‍सा है। बीते करीब दो वर्षों से जारी सुधार कार्यक्रमों के चलते यहां पर महिलाओं को पहले वोट डालने का अधिकार दिया गया था।

इसके बाद मैच देखने, ड्राइविंग करने का भी अधिकार दिया गया। आपको यहां पर ये भी बता दें कि यहां पर काफी समय से महिलाएं अपने लिए कई नियय और कानून में छूट की मांग करती आ रही हैं। ताजे फैसले को महिलाओं की बड़ी जीत भी माना जा रहा है।

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