भूमि पूजन से पहले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का ट्वीट- बाबरी एक मस्जिद थी और हमेशा रहेगी

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 05-08-2020 / 11:32 AM
  • Update Date: 05-08-2020 / 11:32 AM

नई दिल्ली। आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका लोग सैंकड़ों वर्षों से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आज राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम से पहले मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक ट्वीट करके कहा कि बाबरी मस्जिद, एक मस्जिद थी और यह हमेशा रहेगी। बोर्ड ने कहा कि ‘हागिया सोफिया’ मस्जिद हमारे लिए बड़ा उदाहरण है।

बोर्ड ने कहा कि, दुखी होने की जरूरत नहीं है। कोई स्थिति हमेशा के लिए नहीं रहती है। बोर्ड ने अपने ट्वीट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अन्यायपूर्ण बताया है। मु्स्लिम बोर्ड ने यह भी कहा कि अन्‍यायपूर्ण, दमनात्‍मक, शर्मनाक और बहुमत को खुश करने वाले फैसले के जरिए जमीन का अपहरण करने से बाबरी मस्जिद की स्थिति नहीं बदल जाएगी। उसने यह भी कहा कि स्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहती हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विवादित ढांचे और श्री राम मंदिर का फैसला हो पाया लेकिन भूमि पूजन से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है और हागिया सोफिया मस्जिद का उदाहरण देते हुए कहा बाबरी मस्जिद थी हमेशा रहेगी।

बता दें कि 1500 साल प्राचीन विरासत समेटे यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल हागिया सोफिया म्यूजियम को लेकर बड़ी तब्दीली हुई। पिछले महीने जुलाई में टर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यब एर्दोगन ने इस ऐतिहासिक म्यूजियम को दोबारा मस्जिद में बदलने का आदेश दिया।

राष्ट्रपति एर्दोगन ने 1934 के उस फैसले को पलट दिया, जिसके तहत 1434 में इस्तांबुल पर कब्जे के बाद उस्मानी सल्तनत द्वारा मस्जिद में तब्दील हुई हागिया सोफिया को एक म्यूजियम बना दिया गया था। इस ऐतिहासिक इमारत ने कई बार अपनी रंगतों को भी बदलते देखा है। जब ये इमारत बनाई गई तब ये एक भव्य चर्च हुआ करती थी और शताब्दियों तक ये चर्च ही रही। फिर इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया।

गौरतलब है कि हागिया सोफिया दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक रहा है। इसे छठी सदी में बाइजेंटाइन सम्राट जस्टिनियन के हुक्म से बनाया गया था। उस समय इस शहर को कुस्तुनतुनिया या कॉन्सटेनटिनोपोल के नाम से जाना जाता था। 537 ईस्वी में निर्माण पूर्ण होने के बाद इस इमारत को चर्च बनाया गया।

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