कल निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ दी इजाज

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 22-06-2020 / 5:35 PM
  • Update Date: 22-06-2020 / 5:36 PM

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पुरी में होने वाली प्राचीन रथयात्रा को आयोजित करने की शर्तों के साथ इजाजत दे दी है। यानी कल पुरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक व ऐतिहासिक रथ यात्रा निकलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रथयात्रा के आयोजन के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर जरूरी एहतियाती कदम उठाने होंगे।

आदेश में कहा गया है कि कुछ शर्तों के साथ केंद्र और राज्य सरकार इस रथयात्रा के लिए कोविड-19 के गाइडलाइंस के तहत इंतजाम करेंगी। कोर्ट ने कहा कि वो स्थिति को ओडिशा सरकार के ऊपर छोड़ रहा है। अगर यात्रा के चलते स्थिति हाथ से बाहर जाते हुए दिखती है, तो सरकार यात्रा पर रोक भी लगा सकती है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों वाली बेंच ने की। सीजेआई बोबडे ने कहा कि इस मामले में कोर्ट लोगों की सेहत के साथ समझौता नहीं कर सकता। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 18 जून को यात्रा पर रोक के आदेश दिए थे। इस पर केंद्र सरकार ने रिव्यू पिटीशन दायर कर कहा था कि श्रद्धालुओं को शामिल किए बिना यात्रा निकाली जा सकती है।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रथयात्रा करोड़ों लोगों की आस्था का मामला है। भगवान जगन्नाथ कल बाहर नहीं आ पाए तो फिर 12 साल तक नहीं निकल पाएंगे, क्योंकि रथयात्रा की यही परंपरा है।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि एक दिन का कर्फ्यू लगाकर यात्रा निकाली जा सकती है। ओडिशा सरकार ने भी इसका समर्थन किया था कि कुछ शर्तों के साथ आयोजन हो सकता है। इस मामले में सरकार की याचिका से पहले भी 6 रिव्यू पिटीशन लग चुकी थीं।

गुंडिचा मंदिर में जाती रथयात्रा
जगन्नाथ रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होती है। यह मुख्य मंदिर से शुरू होकर 2.5 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर में जाती है। यह भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। जहां भगवान 7 दिन तक आराम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल दशमी को रथयात्रा फिर जगन्नाथ के मुख्य मंदिर पहुंचती है। यह बहुड़ा यात्रा कहलाती है।

स्कंदपुराण में लिखा है कि आषाढ़ मास में पुरी तीर्थ में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है और भक्तों को शिवलोक की प्राप्ति होती है। रथयात्रा से 15 दिन पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान को स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ बीमार होते हैं।

इस वजह से उन्हें 15 दिन तक एकांतवास में रखा जाता है। इस दौरान कुछ पुजारी ही उनके पास होते हैं। उन्हें औषधियों और हल्के आहार का ही भोग लगाया जाता है। रथयात्रा से एक दिन पहले ही भगवान का एकांतवास खत्म होता है।

Share This Article On :
Loading...

BIG NEWS IN BRIEF