जा‍निये क्यों मनाई जाती है ‘गुरु पूर्णिमा’, क्‍या है इसका महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 13-07-2019 / 10:39 PM
  • Update Date: 13-07-2019 / 10:39 PM

इस बार गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई को है। सनातन संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म ग्रंथों की माने तो गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की विधिवत पूजा कर आशीर्वाद लेने से मनुष्य अपने जीनव में सफल होता है। हिंदू संस्कृति में गुरु की महिमा का काफी महिमामंडन किया है। शास्त्रों में कहा गया है कि गुरु के बगैर ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। किसी शुभ काम की शुरुआत करने के लिए गुरु की सलाह और उनके आशीर्वाद का काफी गुणगान किया गया है।

साथ ही मानव जीवन में गुरु के मार्गदर्शन में चलने के महत्व को भी बताया गया है। धर्मशास्त्रों में गुरु के बताए रास्तों पर चलकर इंसान ने साधारण मानव से महामानव तक का सफर तय किया है, वहीं देवताओं ने भी गुरु के सानिध्य में जगत कल्याण किया है। गुरु पूर्णिमा के दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिवस भी माना जाता है। दरअसल वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और महाभारत जैसा काव्य भी उन्हीं की देन है।

महाभारत के 18वें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण गीता का उपदेश देते हैं। बताते चलें कि पुराणों की कुल संख्या 18 है और उन सभी 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। इन्होंने वेदों को विभाजित किया है, जिसके कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

कौन हैं महर्षि वेदव्यास

महाभारत और चार वेदों के रचयिता महर्षि कृष्ण द्वैपायन व्यास को महर्षि वेद व्यास के नाम से जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा 16 जुलाई को है। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। “गु” शब्द का अर्थ है अन्धकार अज्ञान और “रु” शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान। अज्ञान को नष्ट करनेवाला जो ब्रह्मरूप प्रकाश है वह गुरु है इसमें कोई संशय नहीं।

गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा का विधान है। दरअसल गुरु की पूजा इसलिए भी जरूरी है क्यों कि उसकी कृपा से व्यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है। गुरु की महिमा अपरंपार है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। गुरु को तो भगवान से भी ऊपर दर्जा दिया गया है।

गुरुकुल से चली आ रही है परंपरा

पुराने समय में गुरुकुल में रहने वाले विद्यार्थी गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से अपने गुरु की पूजा-अर्चना करते थे। गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु में आती है। इस मौसम को काफी अच्छा् माना जाता है। इस दौरान न ज्यादा सर्दी होती है और न ही ज्यादा गर्मी। इस मौसम को अध्ययन के लिए उपयुक्त माना गया है। यही वजह है कि गुरु पूर्णिमा से लेकर अगले चार महीनों तक साधु-संत विचार-विमर्श करते हुए ज्ञान की बातें करते हैं।

गुरु पूर्णिमा का तिथि व शुभ मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा 2019 – 16 जुलाई
गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 01:48 बजे 16 जुलाई 2019
गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त – 03:07 बजे 17 जुलाई 2019

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर गुरु दीक्षा लेना अपने आप मे अमृत प्राप्त करने जैसा है। इस अवसर पर माता पिता से लेकर अध्यात्म जगत के गुरु को अभिवादन करें। इतिहास में गुरुदेवों की महिमा रही है की गुरु का हाथ जिसके मस्तक और जीवन पर पड़ा उस शिष्य से वो गुरु को भी गर्व हुआ।

हिन्दू धर्म में गुरु को भगवान से ऊपर दर्जा दिया गया है। गुरु के जरिए ही ईश्वार तक पहुंचा जा सकता है। ऐसे में गुरु की पूजा भी भगवान की तरह ही होनी चाहिए। गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर घर के मंदिर में किसी चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर 12-12 रेखाएं बनाकर व्यास-पीठ बनाएं।

इस मंत्र का उच्चारण करें-

‘गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये’

पूजा के बाद अपने गुरु या उनके फोटो की पूजा करें। अगर गुरु सामने ही हैं तो सबसे पहले उनके चरण धोएं। उन्हें तिलक लगाएं और फूल अर्पण करें। उन्हें भोजन कराएं। इसके बाद दक्षिणा देकर चरण स्पर्श करने के पश्चात विदा करें।

Share This Article On :
Loading...

BIG NEWS IN BRIEF