जा‍निये क्‍या है कर्नाटक में सियासत की उठापटक की कहानी, कई मंत्रियों और विधायकों ने दिये इस्तीफे

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 13-07-2019 / 10:11 PM
  • Update Date: 13-07-2019 / 10:11 PM

नई दिल्ली। कर्नाटक ऐसा प्रदेश है, जो सियासी उठापटक के लिए बदनाम रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि राजनीतिक दलों को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हो पाता है। ऐसे में जिनके पास थोड़ी सी भी शक्ति होती है, वह सत्ता पर कब्जा करके मनमानी करना चाहता है। कर्नाटक का मौजूदा सियासी संकट बाहरी वजहों से कम और कांग्रेस और जेडीएस की अंदरूनी उठापटक का नतीजा अधिक है।

कर्नाटक में अब तक कांग्रेस और जेडीएस के कई मंत्रियों और विधायक इस्तीफा दे चुके है। अब कांग्रेस के पांच और बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है, जिसमें कहा गया है कि विधानसभा स्पीकर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इन विधायकों में सुधाकर, रोशन बेग, एमटीबी नारगाज, मुनिरत्न और आनंद सिंह के नाम हैं।

अब इन पांच विधायकों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले बागी विधायकों की संख्या 15 हो गई है। इससे पहले कर्नाटक में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा से इस्तीफा देने वाले असंतुष्ट विधायकों को मनाने के लिए पर्दे के पीछे से बातचीत शुरू कर दी थी।

कुमारस्वामी विश्वास मत कराएंगे-
मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने विधानसभा में सभी को हैरान करते हुए घोषणा की थी कि वह विश्वास मत कराएंगे जिसके एक दिन बाद असंतुष्ट विधायकों को मनाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। कांग्रेस के संकटमोचक माने जाने वाले एवं जल संसाधन मंत्री डी के शिवकुमार सुबह करीब पांच बजे आवास मंत्री एम टी बी नागराज के आवास पहुंचे और वह उन्हें मनाने के लिए करीब साढ़े चार घंटे तक वहां रहे।

खबरों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर भी नागराज को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने के वास्ते उनके घर गए। नागराज ने बुधवार को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी तरह विधायक रामलिंगा रेड्डी, मणिरत्न और आर रोशन बेग को मनाने की कोशिश की गई।

येदियुरप्पा ने कहा, कोई फायदा नहीं, गिरेगी सरकार-
इस पूरी राजनीतिक हलचल पर बीजेपी राज्य अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि इनसे कोई फायदा नहीं होगा और सरकार गिरने ही वाली है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘कांग्रेस और जेडी(एस) में कन्फ्यूजन की स्थिति है, इसलिए विधायक पार्टी छोड़ रहे हैं। विधायकों को वापस लेने के लिए साजिश की जा रही है।’ उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास बहुमत नहीं है, इसलिए विश्वास प्रस्ताव की बात बेकार है।

विधायकों को संभालने की कोशिश में कांग्रेस और बीजेपी-
सूत्रों के मुताबिक सीएम कुमारस्वामी खुद चार कांग्रेसी विधायकों से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगले हफ्ते बहुमत परीक्षण हो सकता है। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही अपने विधायकों को होटेल और रिजॉर्ट में शिफ्ट कर रही हैं।

पिछले साल मई में हुए विस चुनाव में 104 सीटें हासिल कर भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी परंतु भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए जनादेश गंवा देने वाली कांग्रेस ने मात्र 37 सीटें हासिल करने वाली एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जेडीएस को समर्थन दे दिया ताकि कुमार स्वामी की अगुआई में मिली जुली सरकार स्थापित हो जाए।

कांग्रेस और जेडीएस ने जनादेश खो दिया था-
तकनीकी तौर पर उन्हें बहुमत हासिल हो गया परंतु जो सरकार बनी वह नैतिक रूप गलत थी क्योंकि न केवल जेडीएस को राज्य के लोगों ने पूरी तरह नाकारा था बल्कि पांच साल से सत्ता में रही कांग्रेस को भी केवल 77 सीटें ही हासिल हो सकी थी और उसने जनादेश खो दिया था। उस समय भाजपा पर यह आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक तिकड़म को सही ठहराने की कोशिश की कि गोवा और मणिपुर में भाजपा ने भी यही खेल खेला था। उन दोनों प्रदेशों में कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी।

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