जानिए कजरी तीज का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 29-08-2018 / 11:24 PM
  • Update Date: 29-08-2018 / 11:24 PM

हिन्दू धर्म में तीज पर्व का विशेष स्थारन है। यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक है। कहते हैं कि इस दिन व्रत करने से पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ता है और जनम-जनम तक उनका साथ बना रहता है। इस बार कजरी तीज या कजली तीज दिनांक 28 अगस्त दिन बुधवार को मनाया जाएगा। यह व्रत सुहागन महिलाओं का व्रत है। इसे पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। कहते हैं, इस व्रत को रखने से दामपत्य जीवन में माधुर्यता भी आती है। जबकि कुंवारी कन्यागओं को अच्छे वर का आर्शीवाद मिलता है।

कजरी तीज की तिथि और शुभ मुहूर्त
28 अगस्त 2018 को रात्रि 20:41:26 से तृतीया आरम्भ
29 अगस्त 2018 को रात्रि 21:40:13 पर तृतीया समाप्त

कजरी तीज व्रत एवं पूजन विधि –
यह व्रत पूरे दिन निराजल रह कर रखा जता है और फिर चंद्रोदय के बाद व्रत खोला जाता है। इस दिन गाय की भी पूजा की जाती है। गाय को रोटी, गुड़, पालक इत्यादि स्वादिस्ट भोजन कराया जाता है। इस दिन महिलाएं एकत्र होकर कजरी गीत भी गाती हैं। इस दिन नीमड़ी माता की पूजा का भी विधान है। एक तालाब जैसा बना कर उसके पास नीम की टहनी को रोप दिया जाता है। तालाब में दुग्ध और जल डालकर किनारे एक घी का दीपक जलाया जाता है।

एक थाली में पुष्प, हल्दी, अक्षत इत्यादि रखते हैं। एक चांदी के गिलास में दूध भर लेते हैं फिर नीमड़ी माता की पूजा करते हैं। उनको अक्षत चढ़ा कर जल के छीटे देते हैं। उनको फल और द्रव्य चढ़ाते हैं। उस दीपक के उजाले को देखें और प्रणाम करें। अब चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्ध्य दें। चंद्रमा को दूध और जल चढ़ाएं। गेहूं के दाने भी हाथ में लेकर जल से अर्ध्य दे सकते हैं। अर्ध्य के बाद पति का चरण स्पर्श करें और व्रत खोलें।

महिलाएं बीमार या वृद्ध हैं वह इस व्रत पर खाली पेट ना रह कर फल का सेवन कर सकती हैं। इस व्रत में सायंकाल शिव मंदिर भी जाते हैं। अगले दिन तृतीया के समाप्त होते ही व्रत का पारण किया जाता है। दान देने के बाद ही व्रत की पूर्णता मानी जाती है।

इस दिन का पूजा विधान क्या है?
– इस दिन उपवास रखना चाहिए तथा श्रृंगार करना चाहिए।
– श्रृंगार में मेहंदी और चूड़ियों का जरूर प्रयोग करना चाहिए।
– सायं काल शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना करनी चाहिए।
– वहां पर घी का बड़ा दीपक जलाना चाहिए।
– संभव हो तो मां पार्वती और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
– पूजा खत्म होने के बाद किसी सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग की वस्तुएं दान करनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।
– इस दिन काले और सफेद वस्त्रों का प्रयोग करना वर्जित माना जाता है, हरा और लाल रंग सबसे ज्यादा शुभ होता है।

पौराणिक महत्व
माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी इसके लिए उन्होनें 108 साल तक कठोर तपस्या की थी और भवगाव शिव को प्रसन्न किया था। शिवजी ने पार्वती से खुश होकर इसी तीज के दिन अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा करते हैं।

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