भारत को 18 से 19 महीने में मिल जाएगा एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 09-09-2019 / 2:42 PM
  • Update Date: 09-09-2019 / 2:42 PM

नई दिल्ली। भारत को रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की पहली खेप अगले 18 से 19 में तक प्राप्त हो जाएगी। रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव ने रविवार को कहा कि एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को पहले से तय समय के अनुसार भारत को सौंप दिया जाएगा। इस सिस्टम के बाद पाकिस्‍तान की गजनवी, शाहीन और हत्‍फ जैसी कोई भी मिसाइल भारत के आसमान को छू भी नहीं पाएगी।

भारत ने रूस की सबसे उन्नत, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 को खरीदने के लिए 5.43 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। पिछले साल अक्टूबर में काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट (CAATSA) के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लगने के खतरे के बावजूद भारत ने रूस के साथ इस डील को किया था।

अन्य चीजों के अलावा CAATSA लगने पर अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना प्रभावित होता है। सरकारी तास समाचार सर्विस की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए रूसी संघीय सेवा ने इस साल जून में कहा था कि भारत में एस-400 की डिलीवरी 2020 के बाद शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि भुगतान के मुद्दों का भारत के साथ समाधान कर लिया गया है।

बोरिसोव ने कहा कि अग्रिम भुगतान प्राप्त हो गया है और सब कुछ लगभग 18-19 महीनों के भीतर तय समय में कर दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत को आगाह किया था कि एस-400 का सौदा करने पर वह CAATSA कानून के तहत भारत पर प्रतिबंध लग सकते हैं, जो रूस, ईरान और उत्तर कोरिया से रक्षा खरीद को प्रतिबंधित करता है।

नाटो के सहयोगी देश तुर्की को कह दिया गया था कि यदि वह एस-400 को खरीदने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो उसे सबसे एडवांस लड़ाकू विमान एफ-35 को देने से इंकार किया जा सकता है। वहीं, चीन की एक मिलिट्री एजेंसी को साल 2018 में CAATSA के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि, भारत पहले ही यह कहा चुका है कि वह एस-400 प्रणाली को खरीदने के लिए रूस के साथ किए समझौते पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट के मानदंडों को पूरा करता है।

इसके साथ ही नई दिल्ली, मास्को के साथ अपने दीर्घकालिक रक्षा संबंधों से नहीं छोड़ सकता है। भारत ने अमेरिका से यह भी कहा है कि वह रूसी-निर्मित प्रणालियों की खरीद के लिए सौदा छोड़ने का इरादा नहीं रखता है। जून में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में अपने अमेरिकी समकक्ष माइक पोम्पिओ से कहा कि भारत अन्य देशों के साथ व्यवहार करते हुए अपने राष्ट्रीय हित को लेकर चलेगा। इसमें प्रतिबंधों से प्रभावित रूस भी शामिल है, जहां से भारत एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणालियों की खरीद कर रहा है।

एस-400 मिसाइल सिस्टम स्वतंत्र रूप से लक्ष्य को निशाना बनाने के साथ ही अन्य राडार से मिले डेटा हासिल कर सकता है। यह क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों, विमान, ड्रोन, मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) सहित कई लक्ष्यों का पता लगा सकता है, उन्हें ट्रैक कर सकता है और शूट कर सकता है।

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